Delhi-Meerut Corridor : दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल पटरियों पर दौड़ने को तैयार, महज 50 मिनट का होगा सफर, ट्रायल शुरू

Delhi-Meerut Corridor

Delhi-Meerut Corridor : जब से प्रधानमंत्री मोदी ने देश में हाई स्पीड ट्रेन चलाने का सपना देखा है तब से रेलवे गति से कार्य कर रहा है। हम आपको बता रहे हैं कि भारत में पहली रैपिड ट्रेन का सपना पूरा होने वाला है। दिल्ली से मेरठ के बीच रीज़नल रैपिड ट्रांजिट का कार्य लगभग अपने अतिंम चरण में है।

बहुत ही जल्द ये ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नज़र आएगी। इसका ट्रायल पूरा हो चुका है. उम्मीद ये है कि 2023 में ये ट्रेनें चलने लगेगी। इस ट्रेन से दिल्ली से मेरट का सफर मात्र 50 मिनट में पूरा किया जाएगा। ये प्रोजेक्ट 82.5 किलोमीटर लंबा है और इसे दुनिया का सबसे हाईटेक प्रोजेक्ट कहा जा रहा है।

इतने करोड़ में तैयार होगा प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट के लिए कॉरिडोर का निर्माण NCRTC कर रहा है। इसको बनाने में 30.274 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। NCRTC ने रैपिट ट्रेन चलाने और मेंटेनेंस के लिए डायचे बान इंजीनियरिंग और कंस्लटेंसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया है। ये कंपनी जर्मनी रेलवे की सहायक कंपनी हैं। इस प्रोजेक्ट पर 14 हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी और 1100 इंजीनियर कार्य करेंगे। दिन रात मेहनत के बाद 82 किलोमीटर का निर्माण किया जाएगा। इस तरह से किसी भी प्रोजेक्ट पर पहली बार काम किया जा रहा है। कॉरिडोर को बनाने के लिए 6.5 मीचर व्यास की RRTS सुरंगों को बोर करने के लिए 8 टनल बोरिंग की जाएगी। ये बोरिंग मशीनों के माध्यमों से की जाएगी। बोरिंग करने वाली मशीनों का सुदर्शन है।

स्वेदशी कंपनियां निभाएंगी अहम भूमिका

NCRTC इस प्रोजेक्ट पर स्वदेशी कंपनियों के साथ करार कर रही है। कंपनी ने BEL के साथ करार किया है। PSD के माध्यम से यात्री प्लेटफार्म से सीधे कोच में जा पाएंगे। रैपिड ट्रेन को बॉक्बार्डियर गुजरात में बनाया जा रहा है। 40 सेटों के 210 कोचों को मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाएगा।

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इन ट्रेनों में अगर कोई समस्या होगी तो उसको मात्र पांच से 10 मिनट में सही किया जा सकेगा। रेल संचालन में पहली बार रेडियो नेटवर्क लांग टर्म इवोलूशन और यूरोपिय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम डिजिटल इंटरलॉकिंग, ATO के साथ जोड़ा जा रहा है। ये ट्रेन गाज़ियाबाद में मेरठ तिराहे के पास 26 मीटर ऊपर से गुज़रेगी।

इन सुविधाओं से लैस होगी रैपिड रेल

इस ट्रेन में बैठने के लिए आमने सामने सीटें होंगी। इसमें यात्री खड़े होकर भी यात्रा कर सकेंगे। इसके दरवाज़े ऑटोमैटिक होंगे और कुछ दरवाज़ें को बटन के माध्यम से खोलने का भी विकल्प दिया जाएगा। लेकिन हर स्टेशन पर दरवाज़े खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसमें बिज़नेस क्लास कोच भी होंगे और महिलाओं के लिए भी एक डिब्बा होगा।

ये रैपिड रेल 2025 तक पटरियों पर दौड़ने लगेंगी। रेल संचालन से पहले कम दूरी के बीच इन ट्रेनों को चलाया जाएगा। इसका पहला फेज़ 2023 में शुरू होगा। पहले साहिबाबाद से दुहाई तक का सफर शुरू होगा जो कि 17 किलोमीटर का होगा। ये ट्रेनें अधिकतम 180 किलोमीटिर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी। इनकी एवरेज़ स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ये ट्रेनें एक नज़र में बिल्कुल मेंट्रो जैसी नज़र आएंगी।