5 घंटे का तर्क-वितर्क और ट्रिपल तलाक बिल हुआ लोकसभा में पारित

मुस्लिम महिलाओं के लिए यह एक बड़ा दिन है, जब लोकसभा ने ट्रिपल तलाक बिल की खूबियों पर बहस करते हुए आखिरकार विपक्ष की मांगों को खारिज करते हुए सभी सरकारी संशोधनों के साथ इस बिल को पारित कर दिया। अलग-अलग दलों के नेताओं ने प्रस्तावित कानून के मुद्दे पर बात की, जो तत्काल ट्रिपल तलाक को अवैध बना देगा और पति के लिए तीन साल की जेल की अवधि मान्य करेगा। लोकसभा में गुरुवार को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए इस बिल को 238 वोटों के पक्ष में और 12 के खिलाफ पारित किया, जबकि कांग्रेस ने पूरे विपक्ष को पांच घंटे की तगड़ी बहस के बाद सदन को छोड़ने का नेतृत्व किया।

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कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने मांग की थी कि पहले ट्रिपल तलाक बिल को आगे विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा जाना चाहिए । विपक्ष ने तर्क दिया कि बिल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है जिसने तत्काल ट्रिपल तलाक को रद्द कर दिया है। दूसरी ओर, सरकार ने कहा कि इस ट्रिपल तलाक बिल का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करना है। बिल में तत्काल ट्रिपल तलाक को आपराधिक घटना के अन्तर्गत लाया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने अगस्त 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस बिल का ड्राफ्ट तैयार किया, जिसमें इस प्रथा को रद्द किया गया।

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मुसलमानों के बीच ट्रिपल तलाक की प्रथा हटाने के लिए नया बिल 17 दिसम्बर को लोकसभा में जारी अध्यादेश को बदलने के लिए पेश किया गया था I पहले इसे  निचले सदन द्वारा अनुमोदित किया गया था, लेकिन उच्च सदन में कुछ दलों के बीच विरोध के चलते, सरकार ने कुछ संशोधनों को मंजूरी दे दी, जिसमें जमानत का प्रावधान डाला गया I

नया ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा में पुराने बिल की मान्यता को ख़ारिज कर देगा परन्तु यह राज्यसभा में अभी भी लंबित है।

 

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