दिव्यांग बूढ़ीं मां को बच्चों ने सड़क पर लावारिश हालत में छोड़ा, महिला के हैं तीन बेटे और तीन बेटियां


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हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो अपने फर्ज से अनजान तो होते ही हैं साथ में मानवता भी पूरी तरह भूल जाते हैं। मां बाप जिनकी बदौलत बच्चे दुनिया में आते हैं, जो हर मुश्किलों से बचा कर अपने बच्चों को बड़ा करते हैं और उन्हें जीवन जीने का सलीका सिखाते हैं, जब उन्ही मां बाप को उम्र के एक पड़ाव में अपने बच्चों के सहारे की जरूरत पड़ती है तो कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपना फर्ज पूरी तरह से भूलकर अपने अंदर की मानवता को मार कर अपने ही मां बाप को अनाथ बना मरने के लिए छोड़ देते हैं।

दिव्यांग बूढ़ीं मां को बच्चों ने सड़क पर लावारिश हालत में छोड़ा, महिला के हैं तीन बेटे और तीन बेटियां 1

आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताएंगे जिनके तीन बेटे और तीन बेटियां होने के बावजूद बुढ़ापे में वह अकेले रह रही हैं.। यह कहानी बिहार राज्य के बेतिया जिले की दुर्गा देवी की है। ये दिव्यांग है। इनके तीन बेटों ने इनके दिव्यांगता के कारण धनबाद जिले के धनसार स्थित न्यू दिल्ली इलाके में सड़क के किनारे छोड़ दिया और वहां से भाग गए।

दिव्यांग बूढ़ी मां को बच्चों ने दिल्ली में छोड़ा

स्थानीय लोगों ने इन्हें सड़क के किनारे बैठे रोते हुए पाया तो आसपास के लोग एकत्रित हो गए हैं और दुर्गा देवी से पूछताछ करने लगे। इनका मन भर आया और उन्होंने पूरी आपबीती लोगों के सामने बयां कर दी। इनके मुताबिक इनके तीनों बेटे इन्हें ट्रेन से धनबाद लेकर आए और फिर टैक्सी में बिठाकर इस इलाके में लाएं और यहां पर छोड़ दिया। बेटे ये कहकर गए थे कि वो इनके खाने पीने की व्यवस्था करने जा रहे हैं लेकिन वापस नहीं आए।

दिव्यांग बूढ़ीं मां को बच्चों ने सड़क पर लावारिश हालत में छोड़ा, महिला के हैं तीन बेटे और तीन बेटियां 2

स्थानीय लोगों ने जब इनकी आपबीती सुनी तो सबका मन पसीज गया। लोगों ने पास के पुलिस स्टेशन पर इसकी सूचना दी। जिससके बाद धनसार पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर जय प्रकाश प्रसाद ने इनके बूढ़ी दिव्यांग मां के खाने पीने की व्यवस्था की और फिर इन्हें के लालमणि वृद्धा आश्रम भेज दिया। अब ये वृद्ध महिला आश्रम में रहती हैं।

इनकी कहानी हमारे आज के समाज का आइना दिखा रही है कि किस तरह से हमारा समाज स्वार्थी होता जा रहा है। जब तक मां बाप बच्चों का सहारा है तब तक वह उनके लिए महत्वपूर्ण है। और जब उन्हें बच्चों के सहारे की जरूरत पड़ती है तो बच्चे उनसे मुंह मोड़ लेते हैं।

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