Manmohan Singh : जानिए कैसा रहा डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक सफर, 1 बार नहीं 2 बार बने देश के प्रधानमंत्री

Manmohan Singh : देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह रविवार रात को सीने में दर्द की वजह से AIIMS अस्पताल में भर्ती है। फिलहाल उनकी तबियत स्थिर बताई जा रही है।

जवाहर लाल नेहरु के बाद मनमोहन सिंह कॉंग्रेस पार्टी के ऐसे नेता रहे हैं जो बतौर प्रधानमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरी बार भी प्रधानमंत्री बने।

मनमोहन सिंह एक कुशल अर्थशात्री माने जाते हैं। जिन्होंने एक समय पर देश को आर्थिक संकट से उभारा था।

तो चलिए आज हम आपको मनमोहन सिंह के राजनीतिक करियर के बारे में कुछ अहम बातें बताते हैं।

पाकिस्तान में हुआ था Manmohan Singh का जन्म

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पाकिस्तान के गाह नाम के एक गांव में हुआ था। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया और यहीं बस गया. मनमोहन सिंह की 3 बेटियां हैं।

Manmohan Singh की शिक्षा

मनमोहन सिंह ने चंडीगढ़ से B.A.(HONS.) की पढ़ाई पूरी की। B.A. के बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में M.A किया। M.A के बाद मनमोहन सिंह आगे की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए और Phd. पूरी की।

मनमोहन सिंह पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर भी रहे। इसके अलावा उन्होंने दो साल तक ‘दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स’ में भी पढ़ाया। अब तक मनमोहन सिंह प्रसिद्ध अर्थशात्री के तौर पर पहचान बना चुके थे। उनकी काबिलियत के लिए इंदिरा गांधी ने उन्हें सम्मानित किया और RBI का गवर्नर बना दिया।

Manmohan Singh के राजनीतिक करियर की शुरुआत

• मनमोहन सिंह को 1985 में राजीव गांधी के शासन काल में भारतीय योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया। यहां उन्होंने लगातार 5 सालों तक काम किया।

• 1990 में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री का आर्थिक सलाहकार बनाया गया। इस समय एक दौर ऐसा आया था जब देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा था। लेकिन मनमोहन सिंह की बेहतरीन नीतियों की वजह से देश आर्थिक संकट से उभर आया। खासतौर पर मनमोहन सिंह मिडिल क्लास की पसंद बन गए। क्योंकि उनकी कुशल और उदार नीतियों की वजह से मिडिल क्लास को राहत मिली।

• 21 जून 1991 को पीवी नरसिंहा राव के कार्यकाल में मनमोहन सिंह को वित्तमंत्री बनाया गया। मनमोहन सिंह16 मई 1996 तक वित्तमंत्री रहे।

• मनमोहन सिंह 1991 से राज्यकसभा के सदस्य भी रहे हैं। 1998 से 2004 तक मनमोहन सिंह राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे।

Manmohan Singh के प्रधानमंत्री बनने की कहानी

दरअसल 2004 में UPA (United Progressive Alliance) की जीत हुई थी। कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री के लिए सोनिया गांधी का नाम लिया गया। सोनिया गांधी इटली की रहने वाली हैं इसलिए विपक्ष उन्हें बाहरी बताकर विरोध करने लगा। कांग्रेस के पास कोई और विकल्प नहीं बचा था।

इसलिए अचानक फैसला लेकर मनमोहन सिंह (Manmohan Singh)के नाम पर मुहर लगा दी गई. 2004 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने वाले पहले सिख थे।मनमोहन सिंह ने 22 मई, 2004 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

दूसरी बार भी मिला प्रधानमंत्री बनने का मौका

2009 में फिर यूपीए की जीत हुई और कांग्रेस दोबारा सत्ता में आ गई। मनमोहन सिंह ने दोबारा 22 मई 2009 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि 2014 में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला और बीजेपी सत्ता में आ गई। 2014 से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह को मिले अवॉर्ड

1.1987 में ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया।

2.1995 में इंडियन साइंस कांग्रेस ‘जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार’ मिला

3.1993 और 1994 में ‘एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ बनें।

4. 1994 का यूरो मनी ‘अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड मिला

5. 1956 का कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का ‘ऐडम स्मिथ पुरस्कार’ मिला

6.1955 का सेंट जॉन्स कॉलेज में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए ‘राइट पुरस्कार’ मिला