Apra Ekadashi 2019: अपरा एकादशी के दिन होगी धन-धान्य की बारिश, व्रत के अलावा अपनाएं ये आसान उपाय

30 मई यानि आज अपरा एकादशी (Apra Ekadashi 2019) का व्रत है. ये तो सभी जानते हैं कि कि गुरूवार का दिन विष्णु भगवान को समर्पित होता है. भगवान विष्णु की गुरूवार के दिन पूजा-पाठ किया जाता है. गुरूवार के दिन पीले वस्त्र भी पहने जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि पीले वस्त्र पहनने से भगवान विष्णु बहुत खुश होते हैं. इस बार अपरा एकादशी(Apra Ekadashi 2019) गुरुवार को पड़ रही है लेकिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष होने की वजह से इसका महत्व और बढ़ जाता है. ऐसा माना जाता है कि जो भक्त आज के दिन भगवान विष्णु की सच्ची श्रद्धा से पूजा-पाठ करते हैं या उनका व्रत रखते हैं उनके बिगड़े हुए काम जल्द से जल्द बन जाते हैं।

क्यों मनाई जाती है अपरा एकादशी 

अपरा एकादशी(Apra Ekadashi 2019) मनाने के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है. पौराणिक कथाओं में ऐसा बताया गया है कि महीध्वज नाम का एक धर्मात्मा राजा था। जिसका छोटा भाई वज्रध्वज था। राजा का छोटा भाई वज्रध्वज बड़े भाई से नफरत करता था। एक दिन वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई महीध्वज की हत्या कर दी और जंगल में एक पीपल के नीचे गाड़ दिया। अचानक मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा भूत बन गई. वो उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगा।  जो भी शख्स उस रास्ते से गुजरता या पीपल के नजदीक से गुजरता तो वो उनको अपना निशाना बना लिया करता था। एक दिन एक ऋषि इसी रास्ते से जा रहे थे। उन्होंने राजा के भूत को देखा और अपनी शक्तियों के जरिए उससे बातचीत की. ऋषि ने राजा की मृत्यु का कारण पूछा.

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ऋषि ने पीपल के पेड़ से राजा की प्रेतात्मा को नीचे उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया। राजा को प्रेत योनी से आजाद कराने के लिए ऋषि ने खुद अपरा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी के दिन व्रत पूरा होने पर व्रत का फल प्रेत को दे दिया। एकादशी व्रत(Apra Ekadashi 2019) का फल पाने के बाद राजा प्रेतयोनी से मुक्त हो गया और स्वर्गलोक में चला गया।

अपरा एकादशी की पूजा-विधि

अपरा एकादशी (Apra Ekadashi 2019)का व्रत रखने के लिए किसी भी शख्स को सुबह जल्दी उठकर साफ पानी से स्नान करना चाहिए।इसके बाद अपने पूजा घर या मंदिर में विष्णु भगवान और लक्ष्मी माता की मूर्ति को चौकी बनाकर स्थापित करना चाहिए. इसके बाद गंगाजल पीना चाहिए.  इसके बाद घी का दिया जलाकर चौकी के सामने रखें और हाथ में रक्षा कवच पहन लें. व्रत करना शुरू कर दें। इसके बाद विधिपूर्वक भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें। रात में जागरण करें।

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