UPSC Success Story: 22 की उम्र में पहले ही प्रयास में AIR 3 – डोनुरु अनन्या रेड्डी की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story: 22 की उम्र में पहले ही प्रयास में AIR 3 – डोनुरु अनन्या रेड्डी की प्रेरणादायक कहानी

तेलंगाना के महबूबनगर जिले के एक छोटे से गाँव पोन्नेकल से निकली 22 साल की डोनुरु अनन्या रेड्डी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल करके पूरे देश को चौंका दिया। एक मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी, जिसके घर में उससे पहले कोई भी सिविल सेवा में नहीं गया था, उसने बिना किसी बड़ी कोचिंग के सहारे यह कारनामा कर दिखाया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक नई रोशनी है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अगर आप भी UPSC की तैयारी की सोच रहे हैं, तो पहले UPSC Eligibility Calculator से अपनी योग्यता जाँच लें और फिर अपनी रणनीति बनाना शुरू करें।

बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

डोनुरु अनन्या रेड्डी का जन्म तेलंगाना के महबूबनगर जिले के अड्डाकुल मंडल के पोन्नेकल गाँव में हुआ। उनके पिता डोनुरु सुरेश रेड्डी एक छोटे स्व-रोज़गार व्यवसायी हैं और माँ मंजुला गृहिणी हैं। उनकी एक छोटी बहन भी है। परिवार पूरी तरह मध्यम वर्गीय था — ऐसा परिवार जहाँ हर खर्च सोच-समझकर किया जाता था, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को हमेशा सबसे पहली प्राथमिकता दी गई। अनन्या ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा महबूबनगर शहर में पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद चली गईं। गाँव और छोटे शहर के माहौल में पली-बढ़ी अनन्या ने बचपन से ही देखा कि एक ईमानदार अधिकारी बनकर समाज के लिए कितना कुछ किया जा सकता है। यही अहसास धीरे-धीरे उनके मन में सिविल सेवा का सपना बनकर पनपा।

वो सपना जो बचपन से आँखों में था

अनन्या बताती हैं कि स्कूल के दिनों से ही उनकी एकमात्र ख्वाहिश थी — सिविल सर्वेंट बनना और समाज की सेवा करना। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि सालों से सींचा गया एक पक्का इरादा था। इसी इरादे के साथ उन्होंने नई दिल्ली जाने का फैसला किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से भूगोल में बीए (ऑनर्स) में दाखिला लिया। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने UPSC की तैयारी को गंभीरता से शुरू कर दिया था। ग्रेजुएशन पूरी होने के एक साल के भीतर ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉप-3 में जगह बना ली। यह बताता है कि साफ मकसद और सही दिशा हो, तो सफलता के लिए सालों का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।

संघर्ष: कोचिंग नहीं, घर बैठकर तैयारी

अनन्या की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने लगभग पूरी तैयारी घर बैठकर सेल्फ-स्टडी से की। एकमात्र विषय एन्थ्रोपोलॉजी था, जो उनके लिए बिल्कुल नया था, इसलिए उन्होंने हैदराबाद में कुछ महीनों तक इस विषय की एक्सपर्ट कोचिंग ली। बाकी सभी विषयों — प्रीलिम्स, मेंस, इंटरव्यू — की तैयारी उन्होंने खुद अपने कमरे में बैठकर की। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि दिल्ली-मुखर्जी नगर के कोचिंग-संस्कृति के दौर में घर बैठकर तैयारी करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अनन्या ने अपनी क्षमता पर भरोसा रखा और दिखा दिया कि सही योजना और अनुशासन हो, तो कोचिंग एक विकल्प है, अनिवार्यता नहीं।

सफलता की रणनीति

अनन्या खुद कहती हैं कि उन्होंने तैयारी में किसी एक खास फॉर्मूले का पालन नहीं किया, बल्कि रोज़ 12 से 14 घंटे की मेहनत को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनकी रणनीति के कुछ अहम पहलू ऐसे थे जिनसे हर एस्पिरेंट सीख सकता है।

1. रोज़ 12-14 घंटे का अनुशासित अध्ययन

अनन्या ने तैयारी के दौरान हर दिन 12 से 14 घंटे पढ़ाई की। यह सिर्फ घंटों का खेल नहीं था — उन्होंने हर घंटे का हिसाब रखा, कमज़ोर विषयों को ज़्यादा समय दिया और पढ़े हुए को बार-बार दोहराया। उनका मानना है कि निरंतरता ही सबसे बड़ा सीक्रेट है; एक दिन 16 घंटे और अगले दिन 4 घंटे पढ़ने से कहीं बेहतर है रोज़ एक जैसा अनुशासन बनाए रखना।

2. सेल्फ-स्टडी पर पूरा भरोसा

बिना कोचिंग के तैयारी करने का मतलब था कि उन्हें खुद ही नोट्स बनाने, टेस्ट सीरीज़ का विश्लेषण करने और करंट अफेयर्स को व्यवस्थित करने की आदत डालनी पड़ी। उन्होंने एनसीईआरटी और स्टैंडर्ड किताबों को आधार बनाया और खुद की समझ से आंसर राइटिंग का अभ्यास किया। यही आत्मनिर्भरता मेंस परीक्षा में उनके लिए वरदान साबित हुई, क्योंकि लिखने की स्पष्टता ही वहाँ सबसे ज़्यादा मायने रखती है।

3. एन्थ्रोपोलॉजी जैसे ऑप्शनल पर स्मार्ट फैसला

वैकल्पिक विषय के तौर पर उन्होंने एन्थ्रोपोलॉजी चुना, जो उनके लिए बिल्कुल नया विषय था। ईमानदारी से यह स्वीकारते हुए कि इसमें उन्हें मदद चाहिए, उन्होंने हैदराबाद में कुछ महीनों की विशेषज्ञ कोचिंग ली। यह फैसला उनकी परिपक्वता दिखाता है — जहाँ ज़रूरत थी वहाँ मदद ली, जहाँ नहीं थी वहाँ खुद पर भरोसा रखा। ऑप्शनल में मजबूत स्कोर ने उनकी रैंक को टॉप-3 तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

4. मेंटॉरशिप और क्रिकेट से मिली प्रेरणा

अनन्या क्रिकेट की बड़ी प्रशंसक हैं और विराट कोहली को अपना आदर्श मानती हैं। वह कहती हैं कि कोहली की “कभी हार न मानने वाली” मानसिकता से उन्हें प्रेरणा मिलती है — नतीजे जो भी हों, लक्ष्य के लिए मेहनत करते रहो। पढ़ाई के अलावा वह छात्रों को पढ़ाने और मेंटर करने का भी शौक रखती हैं, जिससे उनकी अपनी समझ भी गहरी होती गई।

कामयाबी का वो पल

16 अप्रैल 2024 को जब UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा 2023 का अंतिम परिणाम घोषित किया, तो अनन्या का नाम तीसरे नंबर पर चमक रहा था। कुल 1016 उम्मीदवारों की सिफारिश हुई थी, और 22 साल की अनन्या न सिर्फ पहले प्रयास में सफल हुई थीं, बल्कि इस साल की महिला टॉपर भी बनीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंटरव्यू अच्छा गया था और उन्हें फाइनल लिस्ट में आने की उम्मीद थी, लेकिन तीसरे स्थान की उम्मीद उन्होंने खुद भी नहीं की थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने परिवार और जान-पहचान में सिविल सेवा में जाने वाली पहली व्यक्ति हैं — यह उपलब्धि उनके लिए व्यक्तिगत गौरव से कहीं बढ़कर, पूरे परिवार और गाँव के लिए एक नया इतिहास थी।

युवाओं के लिए संदेश

अनन्या की कहानी हर उस युवा के लिए एक संदेश है जो सोचता है कि UPSC सिर्फ बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वालों का खेल है। एक छोटे व्यवसायी की बेटी, एक गाँव की लड़की, जिसने घर बैठकर 12-14 घंटे की मेहनत से पहले ही प्रयास में AIR 3 हासिल किया — यह साबित करता है कि सफलता का फॉर्मूला संसाधनों में नहीं, संकल्प और अनुशासन में छिपा है। उनका सीधा संदेश है: अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहो, रोज़ की मेहनत को कभी न छोड़ो और नतीजों की चिंता किए बिना काम करते रहो। कोचिंग न होना बहाना नहीं, आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा साथी है।

निष्कर्ष

डोनुरु अनन्या रेड्डी की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि साफ नीयत, कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसा — ये तीन चीज़ें मिल जाएँ तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं रहती। पोन्नेकल के छोटे से गाँव से निकलकर देश की तीसरी रैंक तक का यह सफर आने वाले सालों में लाखों एस्पिरेंट्स को प्रेरित करता रहेगा। अगर आप भी उनके नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं, तो देर न करें — आज ही अपनी तैयारी की योजना बनाएँ और पूरे समर्पण के साथ अपने सपने की ओर बढ़ें।

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