World Malaria Day 2020 : आखिर क्यों मनाया जाता हैं विश्व मलेरिया दिवस, कब हुई इसकी शुरुआत

World Malaria Day 2020 : गर्मी-बरसात के मौसम को वायरल सीजन कहा जाता है। इसमें डेंगू, मलेरिया का सबसे ज्यादा डर रहता है। मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी के बारे में लोग जानकारी रखने के इच्छुक होते हैं. इस बीच 25 अप्रैल को हर साल विश्व में मलेरिया दिवस मनाया जाता है. खैेर, ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल जरुर आता है कि मलेरिया दिवस क्यों मनाया जाता है

? मलेरिया क्या होता है? पहली बार मलेरिया दिवस कब मनाया गया ? इन तमाम सवालों के जवाब आपको इस पूरी खबर को पढ़ने के बाद मिल जाएंगे।

What is maleria : क्या होता है मलेरिया और कैसे फैलता है

मलेरिया एक परजीवी प्लाजमोडियम से परजीवी से फैलता है। ये एक मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर (Marsh Mosquitoes) होता है। जब ये मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर किसी को काटता है तो उसे मलेरिया हो जाता है।

क्यों मनाया जाता है मलेरिया दिवस

वायरल सीजन आते ही भारत में मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से लोगों को जागरुक करने और मलेरिया की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए मलेरिया दिवस मनाने की शुरुआत की गई। भारत में पहली बार (World Malaria Day 2020) मलेरिया दिवस 25 अप्रैल 2019 को मनाया गया। वहीं, दुनिया में पहली बार मलेरिया दिवस 25 अप्रैल 2008 को मनाया गया था। बता दें हर साल दुनिया में बड़ी संख्या में लोग मलेरिया से अपनी जान गवां देते हैं।

World malaria day history : कैसे हुई मलेरिया दिवस की शुरुआत

दरअसल विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान WHO के सदस्यों द्वारा शुरु की गई थी। मलेरिया दिवस हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाता है।

World malaria day theme 2020 : जीरो मलेरिया की शुरआत मुझे से

विश्व मलेरिया दिवस 2020 पर, डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया की थीम “जीरो मलेरिया की शुरुआत मुझसे होती है” रखी है. इसके तरत विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य है कि इसे जमीनी स्तर पर राजनीतिक एजेंडे में मलेरिया को सबसे ऊपर रखे.

World malaria day themes from 2008 to 2020

2008 : बिना सीमाओं की बीमारी

2009 -10 : मलेरिया को भगाओ

2011 : प्रगति और प्रभाव प्राप्त करें

2012 : सतत लाभ ,जिन्दगी बचाओ और मलेरिया में निवेश करो

2013 -14 -15 : भविष्य में निवेश करें, मलेरिया को हराएं

2016 : विश्व की भलाई के लिए मलेरिया का अंत

2017 : अंतराल बंद करें

2018 : मलेरिया को मात देने के लिए तैयार रहें

2019-20 : जीरो मलेरिया की शुरुआत मुझसे होती है

मलेरिया की चपेट में आने वाले 5 देश

बता दें दुनिया में सबसे ज्यादा पांच देश मलेरिया की चपेट में आए हैं । इनमें नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणतंत्र, मोजाम्बिक, बर्किना फासो और सियरा लियोन है।

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इनमें से भी सबसे ज्यादा मलेरिया प्रभावित देश नाइजीरिया है। जहां पर 27 फीसदी लोग मलेरिया से पीड़ित हैं। दूसरे नंबर पर अफ्रीका का कांगो गणराज्य है। जहां 10 फीसदी लोग मलेरिया (World Malaria Day 2020) से संक्रमित होते हैं। वहीं, तीसरे नंबर पर भारत में 6 फीसदी और चौथे नंबर पर मोजांबिक जहां 4 फीसदी मलेरिया से पीड़ित लोग होते हैं।

Symptoms of Maleria : क्या है मलेरिया के लक्षण

1.मलेरिया में पीड़ित को ठंड से तेज बुखार आता है

2. बुखार के साथ तेज सिददर्द होना

3. जी मचलाना और उल्टियां होना

4. पूरे शरीर में दर्द होना, खासतौर पर कमर में दर्द और कमजोरी महसूस होना

5. मलेरिया में पीड़ित को काफी कमजोरी और थकान महसूस होती है

भारत में 2030 तक नहीं नहीं रहेगा मलेरिया

जिस तरह भारत ने पोलियो को देश में जड़ से उखाड़ फेंका है, उसी तरह भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक मलेरिया (World Malaria Day 2020) का पूरी तरह खात्मा कर दिया जाए। इसके लिए भारत में तेजी से काम भी जारी है। तमाम नई नई परियोजनाए चलाई जा रही हैं।

दुनिया में मलेरिया के आंकड़े

विश्व की 3.3 अरब आबादी में करीब 106 देश मलेरिया से प्रभावित हैं। दुनिया में 2012 में मलेरिया की वजह से करीब 6,20,000 लोगों की मौत भी हो चुकी है. जिसमें सबसे ज्यादा अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका के बच्चे शामिल हैं।

भारत मेें मलेरिया से प्रभावित होने वाले राज्य

वहीं, भारत में जो राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं वो उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, मेघालय और नॉर्थ ईस्ट के कई राज्य शामिल हैं। बता दें, दुनिया में 2015 में मलेरिया से 4.46 लाख और 2016 में 4.45 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इसमें भारत चौथा ऐसा देश हैं जहां सबसे ज्यादा मलेरिया से मौत होती है।

भारत में कितने हैं मलेरिया के मरीज

WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2001 में भारत में 20.9 लाख मलेरिया (World Malaria Day 2020) के केस सामने आए थे। वहीं 1005 लोगों की मौत हुई थी। 2014 में 11 लाख मलेरिया के मामले मिले थे और 561 लोगों की मौत हुई थी।

मलेरिया से मौत के बढ़ते आंकड़ों की वजह से केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए 2030 का लक्ष्य रखा है। वहीं आपको बता दं कि भारत से पहले कुछ देशों ने मलेरिया से निपटने की कोशिश की और सफल हुए। भारत से पहले श्रीलंका और किर्गिस्तान में ऐंटी मलेरिया (World Malaria Day 2020) अभियान चलाया गया जो सफल हुआ और वहां मलेरिया को फैलने से रोका गया।

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