UPSC Success Story: किसान के बेटे से UPSC टॉपर तक का सफ़र – प्रदीप सिंह की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story: किसान के बेटे से UPSC टॉपर तक का सफ़र – प्रदीप सिंह की प्रेरणादायक कहानी

हरियाणा के सोनीपत जिले के एक छोटे से गाँव टेवरी में खेती करने वाले एक परिवार का लड़का, जिसने सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू की, आयकर विभाग की नौकरी के साथ-साथ UPSC की तैयारी की और चौथे प्रयास में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया। यह कहानी है प्रदीप सिंह की, जिन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में AIR 1 हासिल करके यह साबित कर दिया कि सपना चाहे कितना भी बड़ा हो, मेहनत और आत्मविश्वास के आगे हर मंज़िल आसान हो जाती है। उनकी कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखता है।

गाँव की मिट्टी से जुड़ा बचपन

प्रदीप सिंह का जन्म साल 1990 में हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर ब्लॉक के टेवरी गाँव में हुआ था। उनके पिता सुखबीर सिंह एक किसान हैं, जिन्होंने दो बार अपने गाँव के सरपंच का दायित्व भी निभाया, जबकि दादा भी एक बार सरपंच रह चुके थे। माँ गृहिणी हैं और परिवार साधारण ग्रामीण माहौल में रहता था। प्रदीप ने गाँव के सरकारी स्कूल में कक्षा सातवीं तक पढ़ाई की, लेकिन बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए पिता ने वर्ष 2000 में पूरे परिवार को सोनीपत शहर स्थानांतरित कर दिया। सोनीपत में उन्होंने शंभू दयाल मॉडर्न स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की और फिर दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री साल 2012 में हासिल की।

IAS बनने का सपना और पहली नौकरी

इंजीनियरिंग के दौरान ही प्रदीप के मन में सिविल सेवाओं की ओर जाने की इच्छा जागी थी। उनका सपना साफ था – IAS अधिकारी बनकर समाज के वंचित वर्गों और किसान समुदाय के लिए काम करना। डिग्री के बाद उन्होंने SSC की कोचिंग ली और साल 2015 के आसपास दिल्ली में आयकर विभाग में इंस्पेक्टर की नौकरी हासिल की। नौकरी लगने के बाद भी उनका लक्ष्य नहीं बदला। वह कहते हैं कि नौकरी के साथ पढ़ाई करना बहुत कठिन काम था, क्योंकि दिन भर के काम के बाद रात को पढ़ने के लिए समय निकालना आसान नहीं था। लेकिन पिता के संस्कार और उनका अपना जुनून उन्हें रोज़ किताबों की ओर खींच लाता था।

संघर्ष के वे दिन जो टूटने नहीं दिए

प्रदीप के संघर्ष की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि सफलता उन्हें पहली बार में नहीं मिली। उन्होंने UPSC की चार बार परीक्षा दी। शुरुआत में उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला जरूर लिया था, लेकिन नौकरी के समय की बाध्यता के कारण कोचिंग जारी नहीं रख पाए। इसके बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी का रास्ता चुना और दोस्तों की मदद से तैयारी आगे बढ़ाई। एक समय ऐसा भी आया जब लगातार असफलताओं और नौकरी की थकान ने उन्हें भीतर से तोड़ना शुरू कर दिया था और उन्होंने तैयारी छोड़ने का मन बना लिया था। ऐसे में पिता सुखबीर सिंह ने उन्हें समझाया कि धैर्य मत खोओ, मेहनत जारी रखो। पिता के ये शब्द उनके लिए संजीवनी साबित हुए और उन्होंने एक बार फिर पूरे हौसले के साथ तैयारी में जुट जाने का फैसला किया।

सफलता की रणनीति: सेल्फ स्टडी और अनुशासन

प्रदीप की तैयारी की रणनीति का सबसे मजबूत पहलू था उनका अनुशासन और निरंतरता। वह कहते हैं कि UPSC में सबसे ज्यादा जरूरी है रोज़ का लक्षित सिलेबस पूरा करना। कभी-कभी उन्हें खुद लगता था कि वह निरंतरता नहीं बनाए रख पा रहे हैं, लेकिन पिता का हौसला और उनका अपना आत्मविश्वास उन्हें पटरी पर लौटा देता था।

नौकरी के साथ समय का प्रबंधन

आयकर इंस्पेक्टर की जिम्मेदारियों के साथ तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन प्रदीप ने हर खाली पल का इस्तेमाल किया। दफ्तर के लंच ब्रेक, शाम का समय और देर रात तक पढ़ाई – उन्होंने अपनी दिनचर्या का हर संभव घंटा सिलेबस की ओर मोड़ा। उनका मानना था कि बड़े सपने के लिए छोटी-छोटी कुर्बानियाँ देनी ही पड़ती हैं और रोज़ की थोड़ी-थोड़ी मेहनत अंत में बड़ी सफलता बन जाती है।

कोचिंग से ज्यादा सेल्फ स्टडी पर भरोसा

कोचिंग छोड़ने के बाद प्रदीप ने पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। कुछ दोस्तों ने उन्हें नोट्स और मार्गदर्शन में मदद की, लेकिन असली मेहनत उनकी अपनी थी। उन्होंने सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटा, हर दिन का लक्ष्य तय किया और नियमित रिवीजन को अपनी आदत बना लिया। उनका यह तरीका साबित करता है कि सही दिशा और ईमानदार मेहनत हो तो बिना महंगी कोचिंग के भी UPSC जैसी परीक्षा में शीर्ष स्थान पाया जा सकता है।

आत्मविश्वास सबसे बड़ा मंत्र

प्रदीप युवाओं को सबसे बड़ी सलाह यही देते हैं कि सेल्फ मोटिवेशन ही किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की सबसे बड़ी कुंजी है। उनका कहना है कि दूसरों की बातों पर ध्यान मत दो, सिर्फ वही जानता है कि उसकी क्षमता क्या है जो खुद मेहनत कर रहा है। यह आत्मविश्वास ही था जिसने उन्हें तीसरे प्रयास में मिली AIR 260 से संतोष न करने दिया और चौथे प्रयास में एयर 1 तक पहुँचा दिया।

सफलता का वह पल

तीसरे प्रयास में प्रदीप को AIR 260 मिली थी और वह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में चयनित होकर फरीदाबाद के NACIN में प्रशिक्षण ले रहे थे। लेकिन IAS बनने का सपना अभी अधूरा था, इसलिए प्रशिक्षण के दौरान ही उन्होंने चौथा प्रयास दिया। 4 अगस्त 2020 को जब UPSC 2019 का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो प्रदीप सिंह का नाम पूरी सूची में सबसे ऊपर था – AIR 1। खबर सुनते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। पिता सुखबीर सिंह उस समय गाँव में थे, जब प्रदीप ने फोन करके बताया कि उन्होंने परीक्षा तो पास कर ली है, और जब पिता ने रैंक पूछा तो उन्होंने धीरे से कहा – पहला स्थान। एक किसान पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती थी कि उसका बेटा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में टॉपर बन गया हो।

युवाओं के लिए संदेश

प्रदीप सिंह का संदेश हर युवा के लिए बहुत स्पष्ट है – सपना देखने से मत डरो, चाहे तुम्हारी पृष्ठभूमि कैसी भी हो। वह खुद गाँव के सरकारी स्कूल से निकले, नौकरी करते हुए पढ़े और तीन असफल प्रयासों के बाद भी हार नहीं मानी। उनका कहना है कि UPSC निरंतरता माँगती है, रोज़ का छोटा लक्ष्य तय करो, उसे पूरा करो और खुद पर भरोसा रखो। वह हमेशा किसानों के दर्द को समझने और उनके कल्याण के लिए काम करने की बात कहते हैं, क्योंकि वह खुद एक किसान के बेटे हैं। उनकी कहानी यह भी सिखाती है कि असफलता अंत नहीं है, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत का एक पड़ाव है।

निष्कर्ष

टेवरी गाँव के खेतों से निकलकर देश के सबसे ऊँचे प्रशासनिक शिखर तक पहुँचने वाले प्रदीप सिंह की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि ईमानदार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से बड़ा कोई हथियार नहीं है। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि लाखों युवाओं को यह विश्वास दिया कि सीमित साधन सपने को छोटा नहीं कर सकते। अगर आप भी सिविल सेवा का सपना देखते हैं तो सबसे पहले अपनी उम्र और प्रयासों की पात्रता जाँच लें – apni eligibility UPSC Eligibility Calculator se jaanchen और फिर पूरी लगन के साथ तैयारी में जुट जाएँ। कौन जाने, अगली सफलता की कहानी आपकी ही हो।

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