UPSC Success Story: नौकरी के साथ पढ़ाई, 5वें प्रयास में AIR 1 – अनूदीप दुरीशेट्टी की प्रेरणादायक कहानी
कहते हैं कि सपनों की उड़ान के लिए पैरों में पंख नहीं, इरादों में मज़बूती चाहिए। तेलंगाना के छोटे से कस्बे मेटपल्ली से निकले अनूदीप दुरीशेट्टी ने यही बात सच कर दिखाई। एक सरकारी इंजीनियर के बेटे, जो खुद गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, उन्होंने आराम की नौकरी के बावजूद सिविल सेवा का सपना चुना। चार बार असफलता झेलने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और पांचवें प्रयास में UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। अगर आप भी सिविल सेवा के बारे में सोच रहे हैं, तो पहले UPSC Eligibility Calculator से अपनी योग्यता जरूर जांच लें। यह कहानी हर उस युवा के लिए है जो नौकरी के साथ पढ़ाई की दुविधा में फंसा है।
छोटे शहर के साधारण परिवार में जन्म
अनूदीप दुरीशेट्टी का जन्म तेलंगाना के जगित्याल जिले के छोटे से कस्बे मेटपल्ली में हुआ था। उनके पिता डी. मनोहर तेलंगाना नॉर्दर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में असिस्टेंट डिवीजनल इंजीनियर थे, जबकि मां डी. ज्योति एक गृहिणी थीं। घर में पढ़ाई का माहौल था, लेकिन ऐसा सपना किसी ने नहीं देखा था कि बच्चा देश का टॉपर बनेगा। अनूदीप बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे और सीखने की गहरी लगन रखते थे। मेटपल्ली के श्री सूर्योदय हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने श्री चैतन्य जूनियर कॉलेज से इंटरमीडिएट पूरी की।
बिट्स पिलानी और गूगल की चकाचौंध
इंटरमीडिएट के बाद अनूदीप का दाखिला देश के प्रतिष्ठित बिट्स पिलानी में हो गया, जहाँ से उन्होंने 2011 में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद उन्हें गूगल के हैदराबाद ऑफिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई, जो किसी भी युवा का बड़ा सपना होती है। लेकिन नौकरी की चकाचौंध भी उनके अंदर जल रही समाज सेवा की आग को बुझा नहीं पाई। इंजीनियरिंग के दिनों में ही उनके मन में यह बात घर कर गई थी कि व्यवस्था के अंदर जाकर बदलाव लाना है। यही सोच उन्हें सिविल सेवा की ओर ले गई।
चार असफलताएं, लेकिन टूटा नहीं हौसला
पहले प्रयास में अनूदीप ने प्रीलिम्स और मेंस तो क्लियर कर लिया, लेकिन इंटरव्यू के आखिरी पड़ाव पर चयन से चूक गए। दूसरे प्रयास में 2013 में उन्हें 790वीं रैंक मिली और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में चयन हुआ, जिसके बाद वह असिस्टेंट कमिश्नर बने। नौकरी मिलने के बाद भी IAS बनने का सपना बरकरार रहा, इसलिए तीसरे और चौथे प्रयास में भी बैठे, पर दोनों बार असफलता ही हाथ लगी। एक तरफ नौकरी की जिम्मेदारियां, दूसरी तरफ रात-दिन की पढ़ाई — फिर भी उन्होंने 2017 का पांचवां प्रयास पूरी ताकत से दिया। उन्होंने कहा था कि यह उनका आखिरी मौका था और उन्होंने इसमें पूरी जान लगा दी।
सफलता की रणनीति
अनूदीप की तैयारी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने बिना किसी बड़ी कोचिंग के, सिर्फ सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन संसाधनों के सहारे यह मुकाम हासिल किया। नौकरी के साथ पढ़ाई का प्रबंधन इस कदर अनुशासित था कि सप्ताहांत वह पूरी तरह तैयारी को समर्पित कर देते थे। उनकी रणनीति के मुख्य बिंदु आज भी हर उम्मीदवार के लिए सीखने लायक हैं।
ऑप्शनल विषय का सही चुनाव
अनूदीप ने मेंस में एंथ्रोपोलॉजी को ऑप्शनल विषय चुना, क्योंकि उन्हें मानव समाज और सभ्यता के अध्ययन में गहरी दिलचस्पी थी। उनका मानना था कि अगर विषय में सच्ची रुचि हो, तो तैयारी बोझ नहीं लगती और लिखने में गहराई अपने आप आती है। कॉन्सेप्ट्स को उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी के उदाहरणों से जोड़कर तैयार किया, जिससे उत्तर मौलिक और प्रभावशाली बनते थे। यही मौलिकता उनके मेंस स्कोर को अलग पहचान देने में काम आई।
लिखित अभ्यास और करंट अफेयर्स
अनूदीप का मानना था कि सिर्फ पढ़ने से काम नहीं चलता, लिखकर अभ्यास करना ही UPSC की असली तैयारी है। वह नियमित उत्तर लेखन की प्रैक्टिस करते थे और हर उत्तर को समय सीमा के अंदर लिखने की आदत डालते थे, ताकि परीक्षा हॉल में दबाव न बने। करंट अफेयर्स के लिए वह दैनिक अखबारों और विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों पर निर्भर रहते थे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने नोट्स खुद तैयार करते थे। पुराने नोट्स की समय-समय पर समीक्षा उनकी तैयारी का अनिवार्य हिस्सा था।
असफलता को विश्लेषण में बदलना
तीन असफलताओं के बाद भी अनूदीप ने गलतियों को हार का ठप्पा नहीं बनने दिया, बल्कि हर असफलता का गहरा विश्लेषण किया। उन्होंने देखा कि कहां अंक कम आ रहे हैं, किस पेपर में प्रस्तुति कमजोर है और इंटरव्यू में किस तरह के सवाल फंसाते हैं। हर प्रयास के बाद उन्होंने रणनीति में बदलाव किया और कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान दिया। यही सीख हर उम्मीदवार के लिए सबसे बड़ा संदेश है कि असफलता असल में एक फीडबैक है, जिसे सही से पढ़ने वाला ही आगे बढ़ता है।
वह लम्हा जब टॉपर बने
28 अप्रैल 2018 को जब UPSC 2017 के परिणाम घोषित हुए, तो पूरे देश ने अनूदीप दुरीशेट्टी का नाम सबसे ऊपर देखा। उन्होंने कुल 2025 में से 1126 अंक हासिल किए, जो उस समय तक UPSC इतिहास में किसी भी टॉपर के सबसे ज्यादा अंक थे। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि अनूदीप तेलंगाना गठन के बाद UPSC टॉप करने वाले पहले व्यक्ति बने। करीब 9.75 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, उन सबमें पहला स्थान हासिल करना मामूली बात नहीं थी। परिणाम के दिन उन्होंने कहा था कि टॉपर बनना उन्हें अभी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था।
युवाओं के लिए संदेश
अनूदीप का साफ कहना है कि UPSC के लिए कोचिंग में दाखिला लेना जरूरी नहीं है, क्योंकि आज इंटरनेट पर सब कुछ उपलब्ध है और जरूरत सिर्फ सही दिशा में मेहनत की है। वह कहते हैं कि लाखों प्रतिभाशाली उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठते हैं, इसलिए टॉप रैंक की उम्मीद कोई नहीं कर सकता, लेकिन लगातार और ईमानदार तैयारी असफल नहीं होती। उनका यह संदेश नौकरीपेशा युवाओं के लिए खास तौर पर प्रेरक है कि अनुशासन के साथ नौकरी और तैयारी दोनों संभाले जा सकते हैं। उन्होंने हमेशा अपने परिवार और दोस्तों के समर्थन को सफलता की रीढ़ बताया।
निष्कर्ष
अनूदीप दुरीशेट्टी की कहानी सिखाती है कि असफलता अंतिम नहीं होती, बशर्ते आप उससे सीखने की तैयारी रखें। गूगल की नौकरी, IRS का पद और चार बार की नाकामी — इन सबके बावजूद पांचवें प्रयास में AIR 1 हासिल करना उनके अटूट धैर्य और रणनीतिक मेहनत का प्रमाण है। छोटे शहर से निकलकर देश का टॉपर बनने का सफर लाखों युवाओं को यह भरोसा देता है कि साधारण पृष्ठभूमि सपनों की सबसे ऊंची उड़ान में बाधा नहीं बन सकती।