Deshal dan ias : शहीद की आखिरी इच्छा थी कि छोटा भाई बनें आईएएस अधिकारी, बिना कोचिंग के यूपीएससी परीक्षा में 83वीं रैंक हासिल कर किया टॉप

Deshal dan ias

Deshal dan ias : जिस तरह कीचड़ में फूल खिलते हैं उसी तरह प्रतिभाशाली लोग अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अपनी पहचान बना लेते हैं। मेहनत और लगन दो ऐसी पूंजी हैं जिनकी बदौलत कोई भी शख्स अपने सपनों को साकार कर सकता है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जिनके पिता चाय की दुकान करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी ना होने के बाद भी उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से यूपीएससी की परीक्षा पास की।

उनका नाम देशल दान है। साल 2017 में देशल दान ने यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली। इतना ही नहीं उन्होंने यूपीएससी में टॉप कर अपने शहीद भाई का सपना और परिवार का नाम रोशन कर दिया।

कौन है आईएएस देशल दान

राजस्थान में जैसलमेर के पास समलाई गांव के रहने वाले देशल (Deshal dan ias) के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी। देशल के पिता का नाम कुशाल दान चरण था। उनके पिता चाय की दुकान चलाते थे। देशल बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति उनके सपनों की उड़ान भरने से रोक रही थी। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। देशल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जैसलमेर से ही की। उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईआईटी की तैयारी शुरू कर दी।

पढ़ाई में अच्छा होने की वजह से उनका (Deshal dan) आईआईटी जबलपुर में एडमिशन हो गया। यहां से बीटेक की पढ़ाई पूरी कर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करना शुरू कर दिया. घर में पैसों की कमी के चलते उन्होंने कोचिंग अथवा किसी संस्थान को ज्वाइन नहीं किया। आईआईटी की तैयारी हो या फिर यूपीएससी की तैयारी उन्होंने कभी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। देशल के पिता कहते हैं की घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए बेटे को कोचिंग में दाखिला नहीं दिला पाया।

शहीद भाई के सपनों को किया पूरा

देशल अपने परिवार में माता पिता और सात भाई बहनों के साथ रहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण सात भाई बहनों में से सिर्फ दो भाई ही पूरी पढ़ाई कर सके थे। अपने भाई बहनों में वो दूसरे ऐसे शख्स थे जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। देसल के (Deshal dan upsc) सिविल सेवा को चुने की कहानी बड़ी दुखद है । दरअसल, देशल के बड़े भाई भारतीय नौसेना में थे। उन्होंने 8 सालों तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवा दी।

भारतीय नौसेना कि आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी में उनकी ड्यूटी लगी हुई थी। किसी कारणवश पनडुब्बी में एक दुर्घटना हो गई जिसके चलते उनके भाई की जान चली गई। देशल के भाई की जब मौत हुई तब वह दसवीं कक्षा में पढ़ाई करते थे। अपने बड़े भाई को याद करते हुए वो कहते हैं की भारतीय नौसेना और सिविल सेवा की कहानियां उनके भाई सुनाया करते थे। बड़े भाई की इच्छा थी कि उनका छोटा भाई भी सिविल सेवा या किसी सैन्य सेवा में शामिल होकर देश की रक्षा करें।

UPSC परीक्षा में 82वीं रैंक की हासिल

देशल बताते हैं कि जब वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे तब उनके परिवार ने उनका बहुत साथ दिया। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद भी पिता और भाई ने मिलकर देशल की किताबों समेत अन्य जरूरी संसाधनों का खर्च उठाया। अपने परिवार की मेहनत को समझते हुए उन्होंने भी रात दिन एक कर पढ़ाई की। इसका नतीजा ये हुआ कि उन्होंने साल 2017 में अपने पहले ही प्रयास के दौरान यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली।

उन्हें इस कठिन परीक्षा में (Deshal dan rank) 82वीं रैंक हासिल हुई। बेटे के आईएएस अधिकारी बनने की खबर जब माता-पिता को पता चली तो काफी खुश हुए। वही, देशल ने अपने बड़े भाई की इच्छा को पूरा कर लिया था। वह उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो मुश्किल हालातों में हार मान लेते हैं। देशल कहते हैं कि उन्होंने गरीबी को बहुत नजदीक से देखा है। इसलिए वह गरीबों के उत्थान के लिए काम करना चाहते हैं।