सरकार के अनाज उत्पादन लक्ष्य में बढ़ोत्तरी से किसानों पर क्या होगा असर

देश के अलग अलग हिस्सों में हल्की फुल्की बारिश के बावजूद कृषि मंत्रालय ने 2018-19 में अनाज की पैदावार के लिए 285.2 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है.सरकार का ये लक्ष्य पिछले साल की अपेक्षा थोड़ा ज्यादा है. बता दें कि, सरकार ने पिछले साल 284.4 मिलियन टन की पैदावार की थी.वहीं, मौसम विभाग का कहना है कि देश में इस मानसून की बारिश में 10 फीसदी की कमी रही है. मंत्रालय की वार्षिक बैठक में कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि देश के कुछ राज्यों में ज्यादा बारिश तो कुछ राज्यो में कम बारिश हुई है.लेकिन इस हल्की फुल्की बारिश के बावजूद हम आशा करते है कि कुलमिलाकर खरीफ का मौसम अच्छा रहेगा.

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2018-19 में 113 मिलियन टन चावल और 100 मिलियन टन भले ही पिछले साल की अपेक्षा थोड़ा ज्यादा है लेकिन सरकार ने दालों और मोटे अनाज और मक्के का लक्ष्य थोड़ा कम रखा है. वहीं, कृषि आयुक्त एस.के मल्होत्रा का कहना है कि  सरकार के द्वारा निर्धारित किया गया लक्ष्य संतुलित होना चाहिए.उन्होंने कहा कि जाहिर है कि हमें खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए ज्यादा अनाज पैदा करना चाहिए लेकिन हमें किसानों की आमदनी के बारे में भी ख्याल करना चाहिए.

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अगर पैदावार का लक्ष्य ज्यादा रखा जाएगा तो ज्यादा उत्पादन होगा जिससे किसानों को नुकसान होगा.क्योंकि बाजार का नियम कहता है कि खपत से ज्यादा उत्पादन होने पर चीजें सस्ती हो जाती है. किसानों को मजबूरी में सस्ते में दालों, अनाज आदि को बेचना पड़ेगा. जिसका खामयाजा किसानों को भुगतना होगा.इसी के साथ आगे उन्होंने कहा कि अगर हम अपना उत्पादन बढ़ा रहे हैं तो हमें विदेशी निर्यात को मजबूत करना होगा.

पिछले दो सालों में सामान्य मानसून और ठीक ठाक फसलों के उत्पादन के चलते कई वस्तुएं की असुंतलित हुई हैं. जिसने किसानों को काफी आहत किया है.बता दें कि केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों की खरीद को बढ़ाया है जिससे बाजार की दरों में गिरावट के बावजूद भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके, लेकिन अगर सरकार ऐसा ही करती रही तो जमा अनाज ज्यादा हो जाएगा जिससे आने वाले में समय में गोदाम में रखने की जगह के लिए कमी आ जाएगी

 

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