UPSC Success Story: 12वीं में फेल से IPS अफसर तक का सफर – मनोज कुमार शर्मा की प्रेरणादायक कहानी
कहते हैं कि असफलता सफलता की पहली सीढ़ी होती है, लेकिन जब कोई 12वीं की परीक्षा में ही फेल हो जाए, घर में दो वक्त की रोटी का संघर्ष हो और रहने के लिए अपना ठिकाना तक न हो, तो यह बात कहना आसान और जीना बहुत मुश्किल होता है। मनोज कुमार शर्मा ने यही मुश्किल जिंदगी जी है और उसी से निकलकर वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी बने हैं। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बिलगांव गाँव से निकलकर उन्होंने 2005 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की और महाराष्ट्र कैडर के IPS अधिकारी बने। उनकी जिंदगी पर लेखक अनुराग पाठक ने ‘ट्वेल्थ फेल’ किताब लिखी और विधु विनोद चोपड़ा ने इसी नाम से फिल्म बनाई, जिसने 2023 में करोड़ों युवाओं के दिलों को छू लिया।
बिलगांव के एक साधारण परिवार से शुरुआत
मनोज कुमार शर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बिलगांव गाँव में हुआ, जो चंबल के उस इलाके में आता है जिसे कभी डकैतों के लिए जाना जाता था। उनके पिता रामवीर शर्मा कृषि विभाग में मामूली नौकरी करते थे और घर की आर्थिक हालत बेहद तंग थी। बचपन से ही मनोज पढ़ाई में औसत से भी नीचे के छात्र थे — नौवीं और दसवीं में उन्हें थर्ड डिवीजन मिली और बारहवीं की परीक्षा में वे पहली बार में फेल हो गए। उस समय उनके इलाके में नकल का चलन आम था, लेकिन सख्त नकल-रोधी नियमों के कारण वे पास नहीं हो सके। हिंदी को छोड़कर बाकी सभी विषयों में वे असफल रहे, और यह उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था।
वह घटना जिसने सपना दिखाया
मनोज के जीवन में असली मोड़ तब आया जब स्थानीय पुलिस ने उनके परिवार के तंबू-नुमा घर को कागजात अधूरे होने का हवाला देकर उखाड़ फेंका। बेघर हुआ परिवार सड़क पर आ गया और इसी अपमान ने मनोज के अंदर कुछ जगा दिया। वे सीधे जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर पहुँचे और वहाँ पूछा कि एसडीएम कैसे बना जाता है। वहीं से उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा के बारे में पता चला और उन्होंने ठान लिया कि वे भी अफसर बनेंगे। यह फैसला उस लड़के का था जिसके पास न पैसे थे, न किताबें और न ही कोई मार्गदर्शन — सिर्फ एक जलता हुआ सपना था।
संघर्ष के दिन: टेम्पो, लाइब्रेरी और भिखारियों के बीच रातें
सपना देखना आसान था, उसे पूरा करना नहीं। तैयारी के लिए मनोज दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुँचे, जहाँ उन्हें जीने के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े। उन्होंने अपने भाई के साथ टेम्पो चलाया, दिल्ली में अमीर परिवारों के कुत्ते टहलाए और एक लाइब्रेरी में चपरासी की नौकरी की। एक दौर ऐसा भी आया जब उनके पास रहने की जगह तक नहीं थी और वे एक मंदिर के पास भिखारियों के बीच सोने को मजबूर हुए। लाइब्रेरी की नौकरी उनके लिए वरदान साबित हुई — वहीं उनकी मुलाकात मैक्सिम गोर्की, अब्राहम लिंकन और मुक्तिबोध जैसे लेखकों की किताबों से हुई, जिन्होंने उनकी सोच को नई दिशा दी। गरीबी और अपमान के बीच भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी।
सफलता की रणनीति
मनोज जानते थे कि उनके पास कोचिंग की फीस देने के पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति खुद बनाई और उस पर अडिग रहे। उनकी तैयारी का हर कदम मेहनत और सादगी से भरा था, और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
किताबों को बनाया सबसे बड़ा गुरु
लाइब्रेरी में चपरासी की नौकरी करते हुए मनोज को किताबों का खजाना मिल गया। उन्होंने पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ महान लेखकों की रचनाएँ पढ़ीं, जिससे उनकी समझ और सोच दोनों गहरी हुईं। महँगी कोचिंग के नोट्स की जगह उन्होंने खुद नोट्स बनाए और बार-बार दोहराए। उनका मानना था कि किताबें सबसे ईमानदार शिक्षक होती हैं — जो कभी किसी से भेदभाव नहीं करतीं।
लिखने की प्रैक्टिस को दी सबसे ज्यादा अहमियत
मनोज की पत्नी श्रद्धा जोशी, जो खुद IRS अधिकारी हैं, ने उनकी लेखन क्षमता सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई। मुखर्जी नगर में तैयारी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और श्रद्धा ने मनोज को उत्तर लिखने की कला सिखाई, उनके लिए नोट्स तक बनाए। मनोज रोज़ाना उत्तर लिखने का अभ्यास करते थे, क्योंकि वे जानते थे कि UPSC मेंस परीक्षा में अच्छा लेखन ही सफलता की कुंजी है।
तीन असफलताओं से हारे नहीं, सीखा
मनोज पहले, दूसरे और तीसरे — तीनों प्रयासों में UPSC परीक्षा में असफल रहे। हर असफलता के बाद उनके पास हार मानने के सौ बहाने थे, लेकिन उन्होंने हर बार अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और तैयारी को और मज़बूत किया। चौथे प्रयास में उन्होंने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। उनका मानना है कि असफलता आपको तोड़ने नहीं, गढ़ने आती है।
चौथे प्रयास में AIR 121 — सपना सच हुआ
2005 में मनोज कुमार शर्मा ने अपने चौथे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए। उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला और यहीं से एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। जो लड़का कभी 12वीं में फेल हुआ था, जो टेम्पो चलाता था और भिखारियों के बीच सोता था, वह अब IPS अधिकारी था। बाद में वे मुंबई पुलिस में डीसीपी और एडिशनल कमिश्नर जैसे पदों पर रहे और 2024 में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर पदोन्नत हुए। उनकी कहानी पर बनी फिल्म ’12वीं फेल’ ने 2023 में देशभर में धूम मचाई और अभिनेता विक्रांत मैसी ने उनका किरदार निभाया।
युवाओं के लिए संदेश
मनोज कुमार शर्मा की कहानी हर उस युवा के लिए है जो एक-दो असफलताओं के बाद हार मान लेता है। वे कहते हैं कि ‘रीस्टार्ट’ करने में कभी देर नहीं होती — चाहे आप 12वीं में फेल हुए हों या UPSC के तीन प्रयास गँवा चुके हों। संसाधनों की कमी बहाना नहीं हो सकती, क्योंकि उनके पास तो रहने की जगह तक नहीं थी। मेहनत, ईमानदारी और सही दिशा में लगातार प्रयास ही सफलता का असली फॉर्मूला है। उनका जीवन इस बात का सबूत है कि शुरुआत चाहे कितनी भी कमजोर हो, मंज़िल आपकी मेहनत से तय होती है।
निष्कर्ष
बिलगांव के एक छोटे-से गाँव से निकलकर IPS अधिकारी बनने तक का मनोज कुमार शर्मा का सफर यह साबित करता है कि किस्मत से बड़ी मेहनत होती है। उन्होंने न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि करोड़ों युवाओं को यह भरोसा दिया कि असफलता अंत नहीं, शुरुआत हो सकती है। आज वे महाराष्ट्र पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में ईमानदारी से सेवा कर रहे हैं और उनकी कहानी किताबों और फिल्मों के ज़रिए हर घर तक पहुँच चुकी है। अगर आप भी UPSC की तैयारी का मन बना रहे हैं, तो शुरुआत करने से पहले अपनी पात्रता UPSC Eligibility Calculator से जरूर जाँच लें और फिर पूरी लगन से अपने सपने की ओर बढ़ें।