हाल के वर्षों में केंद्र और राज्यों के बीच कई मुद्दों पर तनाव देखा गया है। एक प्रशासक के रूप में आप सहकारी संघवाद को कैसे मजबूत करेंगे?
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सिफारिशित दृष्टिकोण
मैं मानूंगा कि केंद्र और राज्य दोनों एक ही नागरिक की सेवा करते हैं, इसलिए टकराव की जगह समन्वय की संस्कृति बनाऊंगा। अंतर्राज्यीय परिषद और क्षेत्रीय परिषदों जैसे मंचों का सक्रिय उपयोग होगा ताकि विवाद संवाद से सुलझें। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार लचीलापन दिया जाएगा। साथ ही, सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान बढ़ाकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करूंगा।
क्यों?
यह प्रश्न संघीय ढांचे की समझ और टकराव-समाधान की प्रशासनिक सोच को परखता है।
मुख्य बिंदु
- समन्वय की संस्कृति
- संवैधानिक मंचों का उपयोग
- योजनाओं में लचीलापन
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
सामान्य गलतियाँ
- एक पक्ष का समर्थन करना
- संघवाद को केवल सैद्धांतिक बताना
संभावित फॉलो-अप प्रश्न
- अंतर्राज्यीय परिषद कितनी बार मिली है?
- GST परिषद सहकारी संघवाद का उदाहरण है?