Rakesh khyalia ias : ट्रक ड्राइवर के बेटे ने पास की यूपीएससी परीक्षा, 152वीं रैंक हासिल कर बना IAS अधिकारी

Rakesh khyalia ias : ट्रक ड्राइवर के बेटे ने पास की यूपीएससी परीक्षा, 152वीं रैंक हासिल कर बना IAS अधिकारी

Rakesh khyalia ias : आम तौर पर हर छोटे-बड़े काम को करने से पहले हमें एक फैसला लेना होता है। हर कोई अपनी जिंदगी में ऐसे तमाम फैसले लेता हैं और ये फैसले ही आगे आने वाले परिणाम को सामान्यतः निर्धारित करते हैं। लेकिन विश्वास से इतर, अक्सर निर्णय लेते वक्त ये पता नहीं होता कि इसका असर आगे क्या होगा? आज हम आपके लिए जो सफलता की कहानी लेकर आए हैं उनका नाम राकेश ख्यालिया है.

लेकिन उन्होंने रिस्क लेते हुए अच्छी खासी नौकरी छोड़कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. इतना ही नहीं राकेश एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे जो कि आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न नहीं था. उनके पिता ट्रक ड्राइवर थे लेकिन सपनों को पूरा करने की ऐसी जिद थी कि उन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़कर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. आइए जानते हैं उन्होंने कैसे यूपीएससी परीक्षा की तैयारी पूरी की.

कौन हैं (Rakesh khyalia ias) राकेश ख्यालिया

राकेश ख्यालिया सीकर के कटराथल के रहने वाले हैं। उन्होंने दौलतपुरा के एक हिंदी मीडियम स्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की है, जिसके बाद सीकर के एक स्कूल से उन्होंने 12वीं तक अपनी पढ़ाई पूरी की है। राकेश ने आगे की शिक्षा कानपुर IIT से ली है। राकेश के पिता सरकारी शिक्षक हैं, लेकिन इस पद पर नियुक्त होने से पहले उन्होंने लंबे समय तक ट्रक ड्राइवरी का काम किया है।

राकेश बताते हैं कि IIT कॉलेज के तीसरे साल में एक टेक्नीकल फेस्टीवल का आयोजन हुआ था। जिसके प्रबंधन का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। करीब ढाई करोड़ के बजट वाले इस कार्यक्रम का जब उन्होंने सफल संचालन किया तो उन्हें प्रबंधन से जुड़े काम में दिलचस्पी बढ़ गई। धीरे-धीरे उनकी रूचि सामाजिक क्षेत्र की तरफ भी होने लगी। इस बीच उन्हें मुंबई में बैंक ऑफ अमेरिका में जॉब मिल गई थी। लेकिन उनका मन अभी भी सिविल सेवा की तरफ ही रहा। आखिरकार उन्होंने परिवार से बातचीत की और नौकरी छोड़कर उन्होंने UPSC की तैयारी की तरफ अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर लिया। हालांकि ये फैसले लेना आसान नहीं रहा।

निराशा मिली लेकिन हार नहीं मानी

राकेश के मुताबिक नौकरी छोड़ने के बाद वो मुंबई से दिल्ली तैयारी करने आ गए। दिल्ली में उन्होंने कोचिंग ज्वाइन की और सिविल सेवा परीक्षा को लेकर मार्गदर्शन लेना शुरू किया। राकेश बताते हैं कि उन्होंने रोजोना 8-9 घंटे पढ़ाई करते हुए अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अनावश्यक तौर पर मोबाइल का उपयोग नहीं किया और सोशल मीडिया पर भी पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए। उन्होंने IAS बनने को ही अपना लक्ष्य माना। क्योंकि वो अच्छी खासी नौकरी छोड़कर तैयारी कर रहे थे, ऐसे में उनके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।

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2019 में राकेश को अपने पहले प्रयास में मात्र 1 नंबर से असफलता का सामना करना पड़ा। जिस वजह से उन्हें हताशा का एहसास होने लगा था। राकेश का कहना है कि उस वक्त वो अपने साथी इंजीनियर्स के बड़े पैकेज के साथ बड़ी कंपनियों में नियुक्ति देखकर काफी विचलित हो जाया करते थे। लेकिन परिवार में पिता और अन्य लोगों की प्रेरणा ने उन्हें हमेशा सकारात्मकता प्रदान की, जिसके दम पर वो आगे बढ़ते रहे और हिम्मत नहीं हारी।

सही दिशा में मेहनत और मार्गदर्शन जरूरी

पहले अटेम्प्ट में भले ही असफलता मिली, लेकिन कहते हैं ना कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। तो राकेश ने भी कोशिश करना बंद नहीं किया। जिसका फल उन्हें अपने अगले प्रयास में मिल गया। 2020 में अपने दूसरे प्रयास में राकेश ने सफलता हासिल कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया 152वीं रैंक और OBC में 28वीं रैंक के साथ UPSC की परीक्षा को पास किया। सफलता पर बात करते हुए राकेश कहते हैं कि अगर धैर्य के साथ सही दिशा में मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। UPSC में सफल होने के लिए मार्गदर्शन लेना भी जरूरी है, जिससे आप बेहतर तैयारी कर सकते हैं और सफलता अर्जित कर सकते हैं।

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