Jivani kartik ias : पहली बार upsc में गुजरात का छात्र टॉप 10 में शामिल, बिना कोचिंग पढ़ाई कर हासिल कि 8वीं रैंक और बनें IAS अधिकारी

Jivani kartik ias : यूपीएससी परीक्षा के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी किसी ना किसी कोचिंग संस्थान का सहारा लेते हैं. लाखों अभ्यर्थियों में से चुनिंदा लोगों की ही सिविल सेवा में नौकरी करने का अवसर मिल पाता है. ऐसे में हर अभ्यर्थी इस परीक्षा को पास करने के लिए पूरी कोशिश करता है. लेकिन आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनका नाम कार्तिक जीवाणी है.

उन्होंने बिना किसी कोचिंग या फिर किसी सहायता के यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और इस परीक्षा को पास कर पहले तो आईपीएस अधिकारी बनें फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत कर आईएएस अधिकारी बन गए. ऐसा नहीं है कि कार्तिक को असफलता नहीं मिली. एक इंजीनियर से आईएएस बनने के बीच उन्हें 4 बार प्रयास करना पड़ा. आइए जानते हैं कार्तिक ने देश की सबसे कठिन परीक्षा के लिए कैसे तैयारी की.

कौन हैं (Jivani kartik ias) आईएएस कार्तिक जीवाणी

गुजरात के सूरत के रहने वाले कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता का नाम नागजी जिवाणी हैं. पिता वराछा इलाके में पैथोलॉजिस्ट हैं तो मां घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं। कार्तिक की शुरुआती पढ़ाई वारछा इलाके से ही हुई. पी.पी और रायन इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई कर उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए. बचपन से ही पढ़ाई में तेज होने के कारण उन्हें अच्छे अंक हासिल हुए.

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बेसिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आईआईटी से इंजीनियरिंग करने की तैयारी शुरू कर दी. आईआईटी एंट्रैन्स एक्जाम पास करने के बाद उन्होंने आईआईटी मुंबई में एडमिशन ले लिया. यहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के चौथे साल उन्होंने सिविल सेवा में अपना करियर बनाने का विचार किया. साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी.

3 प्रयासों के बाद भी नहीं बन सके IAS अधिकारी

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने साल 2017 में पहली बार परीक्षा दी. लेकिन सही रणनीति और पूरी तैयारी ना होने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. उन्होंने अपनी कमियों को सुधारते हुए उन्होंने फिर से यूपीएससी परीक्षा तैयारी शुरू की. और साल 2018 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की. लेकिन 2 अंकों से पीछे रहने के कारण वो आईएएस अधिकारी नहीं बन पाए.

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इसके बाद उन्होंने फिर से प्रयास किया और तीसरे प्रयास में 84वीं रैंक हासिल की. हालांकि इस रैंक को हासिल करने पर भी उन्हें आईएएस की सेवा करने का मौका नहीं मिल सका. लेकिन उन्होंने आईपीएस की हैदराबाद से ट्रेनिंग शुरू कर दी. वो बताते हैं कि यूपीएससी की तैयारी के लिए वो ट्रेनिंग के दौरान 10-12 घंटें की पढ़ाई करते थे.

8वीं रैंक हासिल कर बनें IAS अधिकारी

हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपने लक्ष्य का पीछा नहीं छोड़ा. उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी . साल 2020 की यूपीएससी परीक्षा में उनका सपना साकार हो गया. उन्होंने पूरे देश में 8वीं रैंक हासिल की. 8वीं रैंक हासिल कर वो आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया. एक साक्षात्कार में उन्होने बताया था कि उन्होंने 15 दिनों की हैदराबाद से छूट्टी लेकर परीक्षा दी थी.

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70 सालों बाद कार्तिक गुजरात के पहले आईएएस अधिकारी बनें हैं. वो सूरत के पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने इतनी अच्छी रैंक हासिल की है. इसके पहले सूरत के पूर्व कलेक्टर धावल पटेल देश में 12वें स्थान पर रहे थे। उनकी सफलता इस बात का सबूत है कि किसी काम को आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और लगन से किया जाए तो एक ना एक दिन सपनें जरूर साकार होते हैं.

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