IAS Garima Singh : आंगनवाड़ी स्कूल को गोद लेकर बनाया मॉडर्न स्कूल, पैसों की कमी हुई तो लगा दी अपनी सैलरी

IAS Garima Singh : इस दुनिया में नेक इंसानों की कोई कमी नहीं है। दुनिया में कई ऐसे दरिया दिल लोग हैं जिनमें समाज सेवा की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। आज हम आपको एक ऐसे आईएएस अधिकारी के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपनी इसी भावना के चलते एक आंगनवाड़ी स्कूल को गोद ले लिया और उसे एक मॉडर्न स्कूल में तब्दील कर आंगनवाड़ी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की किस्मत बदल दी। इस आईएएस अधिकारी का नाम गरिमा सिंह है। गरिमा सिंह साल 2015 कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।

कौन हैं (IAS Garima Singh ) आईएएस गरिमा सिंह

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे से गांव कथौली की रहने वाली गरिमा सिंह के पिता का सपना था कि उनकी बेटी आईएएस अधिकारी बनकर उनका नाम रोशन करे। इनके पिता ओंमकार सिंह एक इंजीनियर है। गरिमा के पति राहुल भी एक इंजीनियर है। ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से पूरी करने के बाद गरिमा यूपीएससी की तैयारी में लग गई। साल 2012 में इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की लेकिन रैंक अधिक होने की वजह से इन्हें आईपीएस की पोस्ट मिली।

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इसके बाद इन्हें लखनऊ में एसपी के पद पर पोस्टिंग मिली। 2 साल तक लखनऊ में एसपी के पद पर तैनात गरिमा नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई में भी लगी रही। अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए साल 2015 में एक बार यह फिर यूपीएससी की परीक्षा में उपस्थित हुई। इस साल उन्होंने 55वीं रैंक के यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और अपने पिता का सपना पूरा किया।

खुद का पैसा लगाकर बदली स्कूल की तस्वीर

साल 2016 में आईएएस गरिमा सिंह को झारखंड के हजारीबाग में पोस्टिंग मिली। यहां अधिकारी के रूप में कार्यरत गरिमा सिंह को समाज सेवा करने का भी मौका मिला। हजारीबाग के एक आंगनवाड़ी स्कूल की जर्जर हालत देख गरिमा सिंह का मन भर आया। उन्होंने इस स्कूल की हालत सुधारने का फैसला किया और इसे गोद ले लिया। उन्होंने अपने पैसे लगाकर इस स्कूल की हालत सुधारी और इसे एक जर्जर आंगनवाड़ी स्कूल से एक मॉडर्न स्कूल में तब्दील किया।

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ऐसा करने के लिए उन्होंने सबसे पहले खुद के पैसे से स्कूल की इमारत की मरम्मत कराई। स्कूल में बच्चों के लिए खेल खिलौने की व्यवस्था कराई। जिससे बच्चे खेलकूद के साथ मन लगाकर पढ़ाई कर सकें। इनके इस कदम ने सरकार की भी आंखें खोल दी। उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए सरकार ने 50 ऐसे ही स्कूल बनवाने की घोषणा की। अपने इस कदम के चलते आज आईएएस अधिकारी गरिमा सिंह को नई पहचान मिली है। आज ये अधिकारी के साथ-साथ एक महान समाजसेवी के रूप में भी जानी जाती हैं।

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