Harpreet Singh IAS : टीचर का बेटा पहले बना सेना में जवान फिर शुरू की यूपीएससी परीक्षा की तैयारी, 5 प्रयासों के बाद मिली सफलता और बन गए IAS अधिकारी

Harpreet Singh IAS

Harpreet Singh IAS : कहते हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। सही दिशा में पूरी ईमानदारी के साथ किया गया परिश्रम आपको सफलता की दहलीज पर जरूर पहुंचा देता है। सफलता सिर्फ इसी बात पर निर्भर करती है कि आपकी मेहनत का दायरा कितना बड़ा है। और ये बात हर आम और खास व्यक्ति पर लागू होती है। सिविल सेवा के क्षेत्र में आने की चाहत रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए तो ये और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

हालांकि UPSC की परीक्षा इतनी कठिन है कि बिना परिश्रम के इसमें सफलता मिलनी भी नहीं है। आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनका नाम आईएएस हरप्रीत सिंह है। हरप्रीत की कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जिन्हें असफलता के निराशा मिलती है. क्योंकि उन्हें अपनी मंजिल कई प्रयासों के बाद हासिल हो सकी. आइए जानते हैं देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक यूपीएससी परीक्षा में हरप्रीत को कैसे सफलता मिली

कौन है (Harpreet Singh IAS) हरप्रीत सिंह?

हरप्रीत सिंह मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले हैं। उनके पिता बिजनेसमैन है, जबकि मां शिक्षिका है। हरप्रीत ने लुधियाना के ही ग्रीन ग्रोव पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की है। जिसके बाद उन्होंने कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में BE की डिग्री प्राप्त की है। ग्रेजुएशन के दौरान ही उनके मन में सिविल सेवा को लेकर झुकाव पैदा हुआ और ठान लिया कि वो IAS अफसर बनकर देश की सेवा करेंगे।

ग्रेजुएशन के बाद अपने सपने को साकार करने के लिए वो चंडीगढ़ आ गए और UPSC की कोचिंग ज्वाइन की। इस बीच उन्हें IBM कंपनी में नौकरी मिल गई और वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर वहां भी काम करने लगे। ऐसे में हरप्रीत एक तरफ IAS बनने की तैयारी, तो दूसरी तरफ नौकरी करते रहे।

सफलता और असफलता साथ-साथ चलती रहीं

हरप्रीत ने IAS बनने का सपना पूरा करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की और UPSC का अपना पहला अटेम्प्ट दिया। पहले प्रयास में हरप्रीत ने प्री तो निकाल लिया लेकिन आगे असफल रहे। हालांकि उन्होने हार नहीं मानी और लगातार परीक्षा की तैयारी करते रहे। जब हरप्रीत ने अपना दूसरा और तीसरा अटेंप्ट दिया तो उन्होंने पहले की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन सफलता फिर भी उन्हें नहीं मिल पा रही थी।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ हरप्रीत अन्य कंपटीशन की तैयारी भी कर रहे थे। जब उन्होंने Central Armed Police Forces का एग्जाम दिया तो सफल रहे। जिसके बाद उन्हें BSF में असिस्टेंट कमांडर का पद मिल गया। लेकिन हरप्रीत का सपना IAS बनकर ही देश की सेवा करना था। इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ UPSC की तैयारी भी जारी रखी।

दो बार पास की UPSC की परीक्षा

UPSC के तीन अटेम्प्ट में असफलता के बाद आखिरकार उन्होंने अपने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। हरप्रीत की 2018 में ऑल इंडिया 454वीं रैंक थी, जिसके चलते उनका चयन इंडियन ट्रेड सर्विस के लिए हुआ। जिसके बाद उन्होंने BSF की नौकरी छोड़ दी और ITM के लिए काम करने लगे। हालांकि IAS बनने का सपना अभी भी अधूरा ही था, जिसे पूरा करना ही हरप्रीत का सपना था।

इस बार भी उन्होंने अपने सपने के खातिर पढ़ाई-लिखाई जारी रखें और 2019 में UPSC का अपना पांचवा अटेम्प्ट दिया। इस बार की मेहनत रंग लाई और सिविल सेवा परीक्षा में हरप्रीत टॉप-20 कैंडिडेट्स की लिस्ट में आ गए। ऑल इंडिया 19वीं रैंक लाकर उन्होंने अपने सपने को हकीकत में तब्दील कर दिखाया। हरप्रीत कहते हैं कि सफलता हासिल करने के लिए हमेशा अपना आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।