UPSC Success Story: 10वीं में 44% नंबर, PCS में 10 बार फेल – फिर भी दूसरे प्रयास में AIR 77 – अवनीश शरण की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story: 10वीं में 44% नंबर, PCS में 10 बार फेल – फिर भी दूसरे प्रयास में AIR 77 – अवनीश शरण की प्रेरणादायक कहानी

कहते हैं कि नंबर कभी किसी की किस्मत नहीं लिख सकते, और बिहार के एक छोटे से कस्बे से निकले अवनीश शरण की कहानी इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है। दसवीं कक्षा में महज़ 44.7 प्रतिशत नंबर लाने वाला एक साधारण लड़का, जिसे कोई बड़ा सपना देखने की सलाह भी नहीं देता था, वही आज देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जाना जाता है। राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में दस बार फेल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दूसरे ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर ली। उनकी कहानी हर उस युवा के लिए उम्मीद की किरण है, जो एक-दो असफलताओं के बाद अपने सपनों को तोड़ देता है। अगर आप भी यह सपना देख रहे हैं, तो अपनी उम्र और प्रयासों की पात्रता पहले UPSC Eligibility Calculator से जांच लें, ताकि सही योजना के साथ तैयारी शुरू हो सके।

बिहार के छोटे कस्बे में साधारण बचपन

अवनीश शरण का जन्म बिहार के एक छोटे से कस्बे में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें बड़े शहरों की महंगी कोचिंग या प्राइवेट स्कूलों की सुविधा मिल सके। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में की, जहाँ संसाधनों की कमी तो थी, लेकिन पढ़ने की लगन उनमें शुरू से ही थी। घर में पढ़ाई का माहौल साधारण था, मगर माता-पिता हमेशा अपने बेटे को ईमानदारी और मेहनत का पाठ पढ़ाते थे। गाँव-कस्बे के बच्चे आमतौर पर बड़े सपनों से दूर रहते हैं, लेकिन अवनीश के दिल में कुछ बड़ा करने की चाह धीरे-धीरे पनप रही थी। बचपन की इन्हीं गलियों और सरकारी स्कूल की कक्षाओं ने उनकी जड़ों को मज़बूत किया।

स्कूल के दिनों में अवनीश कोई बहुत चमकदार छात्र नहीं थे। दसवीं कक्षा की परीक्षा में उन्होंने 700 में से सिर्फ 314 नंबर हासिल किए, यानी 44.7 प्रतिशत के साथ थर्ड डिवीजन पास किया। जिस दौर में अच्छे नंबरों को ही सफलता का पैमाना माना जाता था, ऐसे में इतने कम नंबर किसी भी बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ सकते थे। लेकिन अवनीश ने इन नंबरों को अपनी हार नहीं, बल्कि शुरुआत की चेतावनी माना। उन्होंने बारहवीं में 65 प्रतिशत और ग्रेजुएशन में 60 प्रतिशत नंबर लाकर धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई में सुधार किया। ये आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत कैसी भी हो, लगातार कोशिश करने वाला इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सकता है।

IAS बनने का सपना और पहला कदम

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद जब करियर का सवाल सामने आया, तो अवनीश ने अपने मन की सुनी। उन्होंने ठान लिया था कि वह सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करेंगे। उस समय उनके आस-पास के लोग इस फैसले पर हंसते थे, क्योंकि 44 प्रतिशत वाले लड़के से कोई IAS बनने की उम्मीद नहीं करता था। लेकिन अवनीश का मानना था कि नंबर सिर्फ कागज़ पर लिखे आंकड़े हैं, असली ताकत इंसान के इरादों में होती है। उन्होंने CDS और CPF जैसी परीक्षाओं से शुरुआत की, जो UPSC द्वारा ही आयोजित की जाती हैं। इन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन हर असफलता ने उन्हें परीक्षा के पैटर्न और अपनी कमज़ोरियों को समझने का मौका दिया।

इसके बाद उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग यानी PCS की परीक्षा की ओर रुख किया। लेकिन यहाँ किस्मत ने उनका बार-बार इम्तिहान लिया – वह लगातार दस बार PCS के प्रीलिम्स में ही फेल हो गए। दस बार फेल होना किसी भी इंसान को तोड़ने के लिए काफी है, और लोग उन्हें ताने भी मारने लगे थे। मगर अवनीश का हौसला टूटने के बजाय हर बार और मज़बूत होता गया। उन्होंने हर असफलता को एक सबक माना और अपनी गलतियों का विश्लेषण करके तैयारी को और धार दी। यही वो दौर था जब उनके अंदर का असली योद्धा जागा और उन्होंने फैसला किया कि अब सीधे सबसे बड़ी परीक्षा – UPSC सिविल सेवा परीक्षा – में ही किस्मत आज़माई जाएगी।

लगातार असफलताओं का दौर

अवनीश शरण की कहानी का सबसे मुश्किल हिस्सा वह दौर था जब एक के बाद एक दरवाज़े उनके मुँह पर बंद हो रहे थे। CDS में फेल, CPF में फेल और फिर PCS के प्रीलिम्स में दस बार लगातार फेल – यह सिलसिला कई सालों तक चला। इतनी असफलताओं के बाद ज़्यादातर लोग या तो हार मान लेते हैं या फिर अपना रास्ता बदल लेते हैं। अवनीश के सामने भी यही विकल्प थे, और परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नौकरी की ज़रूरत भी दबाव बना रही थी। लेकिन उन्होंने खुद से एक वादा किया था कि जब तक पूरी ताकत नहीं लगा लेंगे, तब तक मैदान नहीं छोड़ेंगे।

इस दौर में उन्होंने अपनी तैयारी की हर कमी को बारीकी से परखा। उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ घंटों पढ़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सही दिशा और स्मार्ट रणनीति की ज़रूरत है। उन्होंने अपने नोट्स दोबारा बनाए, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहराई से अध्ययन किया और अपनी लिखने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया। हर फेल हुए प्रयास के बाद वह खुद से पूछते थे कि कहाँ चूक हुई, और अगली बार उस चूक को दोहराने से बचते थे। यही आत्म-मूल्यांकन की आदत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

सफलता की रणनीति

जब अवनीश ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, तो उनके पास असफलताओं का लंबा अनुभव था, जो किसी भी किताब से बड़ा गुरु था। उन्होंने अपनी रणनीति को बेहद सरल और व्यावहारिक रखा। उनका मानना था कि सीमित किताबों को बार-बार पढ़ना, अनगिनत स्रोतों के पीछे भागने से कहीं बेहतर है। उन्होंने रोज़ाना अखबार पढ़ने को अपनी तैयारी का अभिन्न हिस्सा बनाया, ताकि करेंट अफेयर्स पर उनकी पकड़ मज़बूत रहे। सोशल मीडिया और फालतू की बातचीत से उन्होंने दूरी बना ली, ताकि हर घंटा पढ़ाई के काम आए।

1. सीमित किताबें, गहरी तैयारी

अवनीश शरण हमेशा अभ्यर्थियों को सलाह देते हैं कि पढ़ने की सामग्री को सीमित रखें। उनका मानना है कि एक ही किताब को पांच बार पढ़ना, पांच अलग-अलग किताबों को एक-एक बार पढ़ने से ज़्यादा फायदेमंद होता है। उन्होंने NCERT की किताबों को अपनी नींव बनाया और फिर स्टैंडर्ड रेफरेंस किताबों से अपनी समझ को गहरा किया। हर टॉपिक को पढ़ने के बाद वह खुद से सवाल पूछते थे और अपने शब्दों में जवाब लिखने की प्रैक्टिस करते थे। इससे उनकी अवधारणात्मक स्पष्टता बढ़ी और मेन्स परीक्षा में उत्तर लिखने की क्षमता भी निखरी।

2. रोज़ाना अखबार और करेंट अफेयर्स

अवनीश की तैयारी का दूसरा मजबूत स्तंभ रोज़ाना अखबार पढ़ना था। वह हर सुबह नियत समय पर अखबार पढ़ते और महत्वपूर्ण खबरों के नोट्स बनाते थे। उनका मानना था कि UPSC की परीक्षा में करेंट अफेयर्स सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि पूरे पेपर की रीढ़ है। खबरों को सिर्फ रटने के बजाय वह उनके पीछे के कारणों और असर को समझने की कोशिश करते थे। इससे प्रीलिम्स के साथ-साथ मेन्स के उत्तरों में भी गहराई आई, क्योंकि वह हर मुद्दे को कई पहलुओं से देख पाते थे।

3. असफलता का विश्लेषण, तुलना से दूरी

तीसरी और सबसे अहम रणनीति थी – अपनी तुलना दूसरों से न करना और हर असफलता का ईमानदार विश्लेषण करना। अवनीश कहते हैं कि तैयारी के दौरान दोस्तों और रिश्तेदारों से दूरी बनाना ज़रूरी है, क्योंकि अनावश्यक तुलना और नकारात्मक बातें मनोबल तोड़ती हैं। उन्होंने हर मॉक टेस्ट और हर फेल हुए प्रयास के बाद अपनी गलतियों की सूची बनाई और उन्हें दोबारा न दोहराने का संकल्प लिया। यही आदत उन्हें पहले UPSC प्रयास में इंटरव्यू तक ले गई, भले ही उस बार अंतिम सूची में नाम न आया हो।

वह पल जब सपना सच हुआ

पहले UPSC प्रयास में अवनीश इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम मेरिट लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। यह एक और बड़ी असफलता थी, लेकिन इस बार उनके अंदर कुछ अलग था – उन्हें यकीन हो गया था कि वह यह परीक्षा पास कर सकते हैं। इंटरव्यू तक पहुंचना ही इस बात का सबूत था कि उनकी तैयारी सही दिशा में है। उन्होंने बिना देर किए दूसरे प्रयास की तैयारी शुरू कर दी, और इस बार उनकी मेहनत पहले से भी ज़्यादा केंद्रित थी। उन्होंने अपनी कमज़ोर कड़ियों पर काम किया और इंटरव्यू की तैयारी को भी और गंभीरता से लिया।

और फिर वह दिन आया जिसका इंतज़ार उन्होंने सालों से किया था। UPSC सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित हुए और अवनीश शरण ने ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल की। दसवीं में 44 प्रतिशत नंबर लाने वाला, PCS में दस बार फेल होने वाला लड़का अब 2009 बैच का IAS अधिकारी बन चुका था। आज वह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सेवा दे रहे हैं और अपने काम के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का काम भी करते हैं। साल 2022 में उन्होंने अपनी दसवीं की मार्कशीट सोशल मीडिया पर साझा की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई – 700 में से 314 नंबर देखकर लाखों युवाओं को यह संदेश मिला कि नंबर सिर्फ आंकड़े हैं, भविष्य नहीं।

युवाओं के लिए संदेश

अवनीश शरण अक्सर युवाओं से कहते हैं कि असफलता से डरो मत, बल्कि उसे अपना सबसे बड़ा शिक्षक बनाओ। उनका मानना है कि जिस छात्र के नंबर कम आते हैं, वह भी अगर सही दिशा में लगातार मेहनत करे तो किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है। वह अभ्यर्थियों को सलाह देते हैं कि सीमित किताबें पढ़ें, रोज़ अखबार पढ़ें, सोशल मीडिया से दूर रहें और अपनी तुलना कभी दूसरों से न करें। उनके अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, लेकिन सही रणनीति के साथ की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

उनका जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि शुरुआत कितनी भी साधारण क्यों न हो, इरादे बुलंद हों तो मंज़िल ज़रूर मिलती है। जो युवा एक-दो असफलताओं के बाद हार मान लेते हैं, उन्हें अवनीश की कहानी से सीखना चाहिए कि दस बार फेल होने के बाद भी ग्यारहवीं बार की कोशिश किस्मत बदल सकती है। धैर्य, अनुशासन और खुद पर भरोसा – यही तीन मंत्र उन्होंने अपने जीवन में अपनाए और आज लाखों अभ्यर्थी इन्हीं मंत्रों से प्रेरणा लेते हैं।

निष्कर्ष

अवनीश शरण की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की दास्तान नहीं है, बल्कि यह हर उस सपने देखने वाले के लिए एक संदेश है जिसे दुनिया ने नाकाम करार दे दिया है। 44.7 प्रतिशत नंबर, दस बार PCS में फेल, CDS और CPF में असफलता – इन सबके बावजूद उन्होंने अपने दूसरे ही UPSC प्रयास में AIR 77 हासिल करके साबित कर दिया कि नंबर कभी किसी की क्षमता का पैमाना नहीं हो सकते। उनकी यात्रा बताती है कि असफलताएं रुकावट नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ियां होती हैं, बशर्ते इंसान उनसे सीखने का हौसला रखे।

आज जब वह बिलासपुर में एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं, तो उनकी कहानी देशभर के लाखों UPSC अभ्यर्थियों के दिलों में उम्मीद की लौ जलाती है। अगर आप भी इस राह पर चलने का मन बना रहे हैं, तो देर न करें – अपनी पात्रता जांचें, सही रणनीति बनाएं और पूरी लगन से जुट जाएं। याद रखिए, अवनीश शरण ने साबित किया है कि मंज़िल उन्हीं को मिलती है जो हार मानने से इनकार कर देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *