UPSC Success Story: 60% वाला ‘एवरेज’ छात्र बना UPSC टॉपर, 5वें प्रयास में AIR 3 – जुनैद अहमद की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story: 60% वाला ‘एवरेज’ छात्र बना UPSC टॉपर, 5वें प्रयास में AIR 3 – जुनैद अहमद की प्रेरणादायक कहानी

कभी-कभी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी उन्हीं लोगों को मिलती है, जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता कि वे इतना आगे जाएंगे। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के छोटे से कस्बे नगीना के जुनैद अहमद की कहानी बिल्कुल ऐसी ही है — स्कूल और कॉलेज में लगभग 60 प्रतिशत अंक लाने वाला एक आम-सा छात्र, जो UPSC की परीक्षा में लगातार तीन बार असफल हुआ, लेकिन हार नहीं मानी। पांचवें प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल करके साबित कर दिया कि नंबर कभी किसी की किस्मत तय नहीं करते। अगर आप भी सिविल सेवा का सपना देखते हैं, तो शुरुआत से पहले अपनी eligibility UPSC Eligibility Calculator से जांच लेना एक समझदारी भरा कदम होगा।

नगीना के मध्यवर्गीय परिवार में साधारण शुरुआत

जुनैद अहमद का जन्म बिजनौर जिले के नगीना कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता जावेद हुसैन पेशे से वकील हैं और मां आयशा रज़ा गृहिणी हैं, यानी घर में पढ़ाई-लिखाई को लेकर एक सामान्य और शांत माहौल था, लेकिन कोई बड़ी सुविधाएं या खास रसूख नहीं था। जुनैद की एक बड़ी बहन हैं जिनकी शादी हो चुकी है, और दो छोटे भाई-बहन भी हैं, जिनके बीच वे बचपन से ही एक संजीदा और मेहनती बच्चे के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने नगीना के सेंट मैरी स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। खास बात यह है कि स्कूल से लेकर कॉलेज तक उनके अंक हमेशा लगभग 60 प्रतिशत के आसपास ही रहे — वे न तो कभी क्लास के टॉपर बने और न ही किसी को लगा कि यह लड़का एक दिन देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप करेगा।

इंजीनियरिंग के बाद UPSC का सपना

इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद जुनैद के सामने करियर के कई रास्ते खुले थे, लेकिन उन्होंने 2013-14 के आसपास सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया। उनका कहना था, “मैं मध्यवर्गीय परिवार से आता हूं — भारत में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा IAS बने, मेरे माता-पिता भी अलग नहीं थे।” शुरुआत में वे खुद भी इस सपने को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यकीन हो गया कि मेहनत से वे भी यह कर सकते हैं। परिवार पर आर्थिक बोझ न बढ़े, इसलिए उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी में मुफ्त कोचिंग ली और 2016 से वहीं रहकर रोज़ 8-9 घंटे पढ़ाई की। मेंस की तैयारी के अंतिम चरणों में उन्हें ज़कात फाउंडेशन ऑफ इंडिया जैसे संगठन का मार्गदर्शन भी मिला, जिसने उनकी तैयारी को सही दिशा दी।

तीन बार असफलता, फिर भी हिम्मत नहीं टूटी

UPSC की राह जुनैद के लिए आसान नहीं थी — वे लगातार तीन बार इस परीक्षा में असफल रहे और हर असफलता उनके लिए एक बड़ा झटका थी। लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय हर बार अपनी गलतियों से सीखा और तैयारी को और मज़बूत किया। चौथे प्रयास में आखिरकार सफलता मिली और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 352 हासिल करके भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में जगह बनाई। बहुत से लोगों के लिए यही बहुत बड़ी कामयाबी होती, लेकिन जुनैद का सपना IAS अधिकारी बनकर लोगों की समस्याएं सीधे सुलझाने का था, इसलिए वे रुके नहीं। IRS की ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने पांचवीं बार परीक्षा दी — इस बार पढ़ाई के घंटे घटाकर रोज़ लगभग चार घंटे कर दिए थे, क्योंकि उनकी बुनियाद अब तक काफी मज़बूत हो चुकी थी।

सफलता की रणनीति

बुनियाद के लिए NCERT और चुनिंदा किताबें

जुनैद का मानना था कि तैयारी की नींव NCERT की किताबों से ही बनती है, और उन्होंने सीनियर्स की सलाह पर कुछ चुनिंदा किताबों से अपनी बेसिक समझ मज़बूत की। वे कहते हैं कि ज़्यादा किताबें जमा करने से अच्छा है कि कम किताबों को बार-बार और गहराई से पढ़ा जाए, क्योंकि UPSC में रटने से ज़्यादा समझ काम आती है। उनकी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा यही था — यह जानना कि क्या पढ़ना है, इससे भी ज़्यादा ज़रूरी यह जानना है कि क्या नहीं पढ़ना है। अनावश्यक स्टडी मटेरियल से बचकर उन्होंने अपना कीमती समय बचाया और हर विषय को फोकस्ड तरीके से तैयार किया। यही फोकस्ड अप्रोच बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

इंटरनेट और मुफ्त संसाधनों का समझदारी भरा इस्तेमाल

जुनैद ने महंगी कोचिंग या ढेर सारे नोट्स पर निर्भर रहने की बजाय इंटरनेट का भरपूर और सही इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि आज सब कुछ ऑनलाइन मुफ्त में उपलब्ध है, बस उसका प्रोडक्टिव इस्तेमाल करना आना चाहिए। करंट अफेयर्स, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और टॉपर्स के अनुभव — इन सबके लिए उन्होंने मुफ्त ऑनलाइन संसाधनों का सहारा लिया। छोटे शहर के एक मध्यवर्गीय छात्र के लिए यह रणनीति किसी वरदान से कम नहीं थी, क्योंकि इससे तैयारी का खर्च लगभग शून्य हो गया। यह बात आज के हर उस अभ्यर्थी के लिए बड़ी सीख है जो सोचता है कि बिना महंगी कोचिंग के UPSC नहीं निकाला जा सकता।

जियोग्राफी ऑप्शनल का सोच-समझकर चुनाव

मेंस परीक्षा के लिए जुनैद ने जियोग्राफी को ऑप्शनल विषय के रूप में चुना, और यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक था। जियोग्राफी का बड़ा हिस्सा जनरल स्टडीज़ के विषयों से मेल खाता है, जिससे एक ही तैयारी से दो पेपर मज़बूत हो जाते हैं और समय की काफी बचत होती है। इससे उनकी ओवरऑल तैयारी संतुलित रही और किसी एक विषय पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ नहीं पड़ा। ऑप्शनल का चुनाव करते समय अपनी रुचि के साथ-साथ GS से ओवरलैप को देखना — यह टिप हर अभ्यर्थी के काम की है।

रोज़ की नियमित पढ़ाई, घंटों की गिनती नहीं

जुनैद रोज़ लगभग 5-6 घंटे पढ़ते थे, लेकिन उनका ज़ोर घंटों की गिनती पर नहीं, नियमितता और गुणवत्ता पर था। आखिरी प्रयास में जब वे IRS की ट्रेनिंग भी कर रहे थे, तब भी उन्होंने रोज़ लगभग चार घंटे की पढ़ाई जारी रखी और उसी में टॉप-3 रैंक हासिल कर ली। उनका मानना है कि रोज़ थोड़ी-थोड़ी लेकिन ईमानदार पढ़ाई, हफ्ते में एक दिन की 14 घंटे की पढ़ाई से कहीं बेहतर होती है। लगातारता ही वह जादू है जो औसत छात्र को भी टॉपर बना सकता है — बशर्ते ध्यान भटके नहीं।

पांचवें प्रयास में AIR 3 — कामयाबी का पल

अप्रैल 2019 में जब UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2018 का परिणाम आया, तो जुनैद उस समय फरीदाबाद की अकादमी में IRS की ट्रेनिंग ले रहे थे। फोन पर बधाइयों का तांता लग गया था — उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की थी। जुनैद ने खुद कहा था, “मुझे उम्मीद थी कि मेरा नाम लिस्ट में होगा, लेकिन तीसरी रैंक की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।” 2019 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के झांसी में हुई। उनका कहना है कि IRS में भी काम लोगों से जुड़ा होता है, लेकिन IAS अधिकारी बनकर वे लोगों की समस्याएं सीधे सुलझा सकेंगे — और यह उपलब्धि से ज़्यादा एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।

युवाओं के लिए जुनैद का संदेश

जुनैद अपनी सफलता के तीन मंत्र बताते हैं — लक्ष्य (Aim), कड़ी मेहनत (Hardwork) और असफलताओं को संभालना (Handle failures)। उनका संदेश साफ है: स्कूल-कॉलेज के नंबर आपकी मंज़िल तय नहीं करते, तय करती है आपकी लगन। वे खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित करना चाहते हैं जो कमज़ोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और सोचते हैं कि यह परीक्षा उनके लिए नहीं है — उनके शब्दों में, “सबसे ज़्यादा मायने सिर्फ कड़ी मेहनत और फोकस रखता है।” तीन बार की असफलता के बाद भी डटे रहने वाले जुनैद की कहानी हर उस छात्र के लिए उम्मीद की किरण है जो आज खुद को “एवरेज” समझकर हार मानने वाला है।

निष्कर्ष

जुनैद अहमद का सफर इस बात का जीता-जागता सबूत है कि शुरुआत चाहे जितनी साधारण हो, मंज़िल असाधारण हो सकती है — बशर्ते इरादे मज़बूत हों। 60 प्रतिशत अंकों वाला छात्र, तीन बार की असफलता, मुफ्त कोचिंग, इंटरनेट से पढ़ाई और पांचवें प्रयास में AIR 3 — यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की कामयाबी नहीं, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक खाका है। अगर आप भी इस राह पर चलना चाहते हैं, तो याद रखिए: असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की सबसे ईमानदार तैयारी होती है।

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