Kisan Success Story: गर्म मैदानों में सेब उगाने वाले ‘सेब सम्राट’ – हरिमन शर्मा की प्रेरणादायक कहानी
कल्पना कीजिए कि आप उत्तर भारत की तपती गर्मी में खड़े हैं, जहां पारा चालीस डिग्री से ऊपर चढ़ा हुआ है, और उसी धूप में सामने हरे-भरे सेब के पेड़ लहलहा रहे हैं, जिन पर लाल-पीले रसीले सेब झूम रहे हैं। यह कोई फिल्मी कल्पना नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के एक साधारण किसान हरिमन शर्मा की मेहनत का नतीजा है। कभी लोगों ने कहा था कि मैदानी इलाकों और गर्म जलवायु में सेब उगाना नामुमकिन है, लेकिन हरिमन शर्मा ने एक बीज से शुरुआत करके वह कर दिखाया जिसने पूरे देश के कृषि मानचित्र को बदल दिया। उनकी विकसित किस्म HRMN-99 आज 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है, और इस असाधारण योगदान के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस 2025 पर पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
बचपन और शुरुआती संघर्ष
हरिमन शर्मा का जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र के पनियाला गांव में हुआ था, और उनकी जिंदगी की शुरुआत ही संघर्षों से भरी रही। बचपन में ही वह अनाथ हो गए, जिसके बाद उनके सामने जिंदगी जीने का रास्ता खोजना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। गरीबी और अभाव के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जैसे-तैसे मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की। स्कूल के बाद खेती ही उनका सहारा बनी, और धीरे-धीरे उन्हें पेड़-पौधों और फलों की खेती यानी पोमोलॉजी में गहरी रुचि पैदा होने लगी। उनके पास न बड़ी जमीन थी, न पूंजी, न ही कोई ऊंची डिग्री, लेकिन उनके पास एक चीज थी जो सबसे कीमती थी — सवाल पूछने और जवाब खोजने की जिज्ञासा।
बदलाव का मोड़: एक सेब का बीज
साल 2005 वह साल था जब हरिमन शर्मा के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ आया। उन दिनों सेब की खेती केवल ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक सीमित मानी जाती थी, क्योंकि पारंपरिक सेब की किस्मों को फलने के लिए लंबे समय तक ठंड यानी चिलिंग आवर्स की जरूरत होती थी। हरिमन ने सोचा कि क्या ऐसा सेब नहीं हो सकता जो कम ठंड और गर्म जलवायु में भी फल दे सके। बस यहीं से उन्होंने एक सेब के बीज से प्रयोग शुरू किए और कलमबंदी यानी ग्राफ्टिंग की विभिन्न तकनीकों को आजमाना शुरू कर दिया। यह कोई प्रयोगशाला का काम नहीं था; यह एक किसान की अपनी जमीन पर सालों तक चली साधना थी, जिसमें हर पेड़ को बारीकी से देखा गया और हर मौसम का हिसाब रखा गया।
HRMN-99: असंभव को संभव बनाने वाली किस्म
सालों के धैर्य और निरंतर प्रयोग के बाद हरिमन शर्मा ने HRMN-99 नाम की एक अनोखी सेब किस्म विकसित की, जो कृषि विज्ञान के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। यह किस्म स्व-परागण करने वाली और कम ठंड वाली यानी लो-चिलिंग किस्म है, जो समुद्र तल से मात्र 1800 फीट की ऊंचाई पर भी फल दे सकती है, जबकि पारंपरिक सेब की खेती के लिए कहीं अधिक ऊंचाई और लंबी सर्दी चाहिए होती थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह किस्म उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और मैदानी इलाकों में 40 से 46 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी में भी पनप सकती है। इसके फल पर लाल-पीली धारियां होती हैं, गूदा नरम और रसीला होता है, और एक पौधा साल में 75 किलोग्राम तक फल दे सकता है।
सफलता की रणनीति
हरिमन शर्मा की सफलता कोई संयोग नहीं थी; इसके पीछे उनकी सोच-समझकर बनाई गई रणनीति काम कर रही थी, जिसे हर किसान और युवा अपने जीवन में उतार सकता है। उन्होंने हर कदम पर जल्दबाजी नहीं की, बल्कि प्रकृति के नियमों को समझकर धीरे-धीरे आगे बढ़े। आइए उनकी इस रणनीति के चार महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
1. धैर्य के साथ प्रयोग और निगरानी
हरिमन शर्मा ने एक ही बीज से शुरुआत करके सालों तक विभिन्न कलमों और ग्राफ्टिंग तकनीकों का प्रयोग किया, और हर प्रयोग का परिणाम उन्होंने ध्यान से नोट किया। उन्होंने कभी एक-दो असफल मौसम से हार नहीं मानी, बल्कि हर नाकाम पेड़ से यह सीखा कि अगली बार क्या सुधार करना है। उनकी यह आदत बताती है कि खेती में सबसे बड़ी पूंजी पैसा नहीं, बल्कि धैर्य और निरंतर निरीक्षण होता है। जो किसान हर फसल को एक प्रयोग की तरह देखता है, वही एक दिन नई खोज कर पाता है।
2. कलमबंदी और सही चयन की कला
सेब के बीज से उगे पौधे में वांछित गुण हमेशा नहीं आते, इसलिए हरिमन ने कलमबंदी की कला को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अलग-अलग किस्मों की कलमों को जोड़कर देखा और उन पौधों का चयन किया जिनमें कम ठंड में फलने, गर्मी सहने और जल्दी पकने के गुण एक साथ मौजूद थे। इस चयन प्रक्रिया में उन्होंने स्वाद, आकार और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया, ताकि नई किस्म बाजार में पारंपरिक सेब को टक्कर दे सके। यही वजह है कि HRMN-99 का फल जून तक पक जाता है, जब बाजार में सेब की कीमतें ऊंची होती हैं और किसानों को अधिक मुनाफा मिलता है।
3. वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ाव
अपने प्रयोगों को सिर्फ अपने खेत तक सीमित रखने के बजाय हरिमन शर्मा ने राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान यानी नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से जुड़ाव बनाया, जिसने उनकी किस्म की विशिष्टता को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित किया। साल 2012 में उनकी किस्म का वैज्ञानिक परीक्षण हुआ और आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से देशभर में बहु-स्थान परीक्षण कराए गए। उनकी किस्म को पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के तहत पंजीकृत भी किया गया, जिससे उनकी खोज को कानूनी मान्यता मिली। इससे सीख मिलती है कि किसान की जमीनी खोज और वैज्ञानिक संस्थानों का साथ मिल जाए तो उसका असर पूरे देश तक पहुंचता है।
4. नर्सरी बनाकर किसानों तक पहुंचाना
खोज कर लेना ही काफी नहीं था; हरिमन शर्मा ने घुमारवीं के पनियाला में अपनी नर्सरी बनाई और HRMN-99 के पौधे देशभर के किसानों तक पहुंचाने का काम शुरू किया। उनकी नर्सरी से आज हजारों किसान पौधे लेकर अपने खेतों में सेब उगा रहे हैं, और यह किस्म 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैल चुकी है। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति भवन के बगीचों में भी HRMN-99 के पेड़ लगे हैं, जो उनकी खोज की प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा प्रमाण है। एक किसान के हाथ से निकला पौधा जब देश के सबसे प्रतिष्ठित बगीचे तक पहुंचता है, तो यह हर ग्रामीण युवा के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण होती है।
सफलता का पल: पद्म श्री तक का सफर
हरिमन शर्मा के योगदान को समय-समय पर कई सम्मान मिले, जिनमें 2017 का राष्ट्रीय पुरस्कार और लगभग 19 राष्ट्रीय तथा 15 राज्य स्तरीय पुरस्कार शामिल हैं। लेकिन सबसे बड़ा पल तब आया जब गणतंत्र दिवस 2025 पर केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित करने की घोषणा की। बचपन में अनाथ हुआ वह लड़का, जिसने केवल मैट्रिक तक पढ़ाई की थी, अब राष्ट्रपति भवन में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा गया। उन्हें लोग प्यार से ‘सेब सम्राट’ और ‘भारत के एप्पल मैन’ कहने लगे, और उनकी कहानी हर उस किसान के लिए प्रेरणा बन गई जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखता है।
युवाओं के लिए संदेश
हरिमन शर्मा की कहानी युवाओं को यह सिखाती है कि डिग्री और पूंजी से बड़ा हथियार जिज्ञासा और लगन होती है। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि वह छोटे किसान हैं और बड़ी खोज केवल वैज्ञानिकों का काम है; उन्होंने बस एक सवाल पूछा और उसका जवाब खोजने में सालों लगा दिए। आज के युवा अगर अपनी जड़ों से जुड़कर खेती में नवाचार करें, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि गर्व और समृद्धि का रास्ता बन सकती है। उनका संदेश साफ है — प्रयोग करने से डरो मत, असफलता से सीखो, और अपनी मिट्टी की ताकत पर भरोसा रखो।
निष्कर्ष
हरिमन शर्मा ने साबित कर दिया कि एक साधारण किसान भी असाधारण बदलाव ला सकता है, अगर उसके पास धैर्य, दूरदर्शिता और मेहनत का जज्बा हो। उनकी HRMN-99 किस्म ने सेब को अमीरों के फल से निकालकर आम आदमी की पहुंच तक पहुंचा दिया है और गर्म इलाकों के लाखों किसानों के लिए आय का नया रास्ता खोल दिया है। अनाथ बचपन से पद्म श्री तक का उनका सफर हर भारतीय के दिल को छूता है और यह याद दिलाता है कि मिट्टी से जुड़ा हर हाथ देश का भविष्य बदल सकता है। ऐसी प्रेरणादायक कहानियां ही हमारे गांवों के युवाओं को खेती की ओर लौटने का हौसला देंगी।