UPSC Success Story: ऑटो ड्राइवर के बेटे से 21 साल में IAS तक – अंसार अहमद शेख की प्रेरणादायक कहानी

UPSC Success Story: ऑटो ड्राइवर के बेटे से 21 साल में IAS तक – अंसार अहमद शेख की प्रेरणादायक कहानी

कहते हैं कि इंसान की किस्मत उसके हालात से नहीं, उसके हौसलों से लिखी जाती है। महाराष्ट्र के जालना जिले के छोटे से गांव शेलगांव में पैदा हुए अंसार अहमद शेख की कहानी इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। एक ऑटो रिक्शा चालक का बेटा, जिसने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह एक दिन देश के सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक पर पहुंच जाएगा, आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महज 21 साल की उम्र में, पहले ही प्रयास में UPSC की परीक्षा पास करके वह देश के सबसे युवा IAS अधिकारी बने।

मुश्किल हालातों में बीता बचपन

अंसार का जन्म 1 जून 1994 को महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना जिले के शेलगांव गांव में हुआ था, जो एक सूखा-ग्रस्त और आर्थिक रूप से पिछड़ा इलाका है। उनके पिता यूनुस शेख अहमद ऑटो रिक्शा चलाते थे, जबकि मां अदीला शेख खेतों में मजदूरी करके घर चलाती थीं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाता था। अंसार ने खुद कई इंटरव्यू में बताया है कि उनका घर गरीबी, शराब की लत और घरेलू कलह से प्रभावित था। उनके पिता की तीन शादियां थीं और अंसार की मां उनकी दूसरी पत्नी थीं, जिससे परिवार का माहौल पढ़ाई के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं था।

परिवार की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। अंसार की दोनों बहनों की शादी बहुत कम उम्र में कर दी गई, और उनके छोटे भाई अनीस को सातवीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ना पड़ा ताकि वह एक मोटर गैरेज में काम करके घर का खर्च उठा सके। गौर करने वाली बात यह है कि यही भाई बाद में अंसार की UPSC की तैयारी में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। अंसार गांव के जिला परिषद स्कूल में पढ़ते थे, जहां सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं था, लेकिन उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें कभी हार नहीं मानने दी।

पढ़ाई ने खोला सपनों का दरवाजा

हालात चाहे जितने मुश्किल रहे हों, अंसार पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे। रिश्तेदार अक्सर उनके माता-पिता से कहते थे कि पढ़ाई में पैसा लगाने का क्या फायदा, लेकिन चौथी कक्षा में उनके एक शिक्षक ने माता-पिता को समझाया कि उनका बेटा बहुत होशियार है और पढ़ाई में निवेश कभी बेकार नहीं जाएगा। उस शिक्षक की बात अनपढ़ माता-पिता के लिए बहुत मायने रखती थी, और उन्होंने अंसार की शिक्षा को जारी रखने का फैसला किया। अंसार ने अपने शिक्षक का भरोसा गलत साबित नहीं होने दिया और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए, जो उनके गांव में एक असाधारण उपलब्धि थी।

स्कूल की पढ़ाई के बाद अंसार पुणे के प्रतिष्ठित फर्ग्यूसन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल करने पहुंचे। यहीं से उनके सपनों ने एक नई उड़ान भरी। उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा देने का मन बनाया और खुद को इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया। स्नातक में उन्होंने 73 प्रतिशत अंक पाए और इसी दौरान उन्होंने UPSC की तैयारी की नींव भी रख दी। अंसार को पता था कि उनके परिवार के पास दूसरा प्रयास झेलने की आर्थिक ताकत नहीं है, इसलिए उन्हें पहले ही प्रयास में सफल होना था।

संघर्ष और त्याग की कहानी

UPSC की तैयारी का सफर अंसार के लिए आसान नहीं था। पहले उन्होंने एक साल तक कोचिंग ली और फिर तीन साल तक दिन-रात कड़ी मेहनत की। इन तीन सालों में वह रोजाना लगभग 12 से 13 घंटे पढ़ाई करते थे, जबकि अपनी पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए कई छोटी-मोटी नौकरियां भी करते थे। अंसार बताते हैं कि कोचिंग में उन्हें अक्सर सवाल पूछने पर हंसी का सामना करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी सवाल पूछना बंद नहीं किया। उनके मुताबिक, UPSC के एक छात्र के लिए जिज्ञासा की भावना सबसे जरूरी चीज है।

सबसे बड़ी चुनौती थी आर्थिक तंगी और घर का माहौल। जब अंसार ने अपने परिवार को बताया कि वह UPSC की परीक्षा दे रहे हैं, तो परिवार वालों को यकीन ही नहीं हुआ। उस समय परिवार में शिक्षा कभी प्राथमिकता नहीं थी, लेकिन अंसार ने हार नहीं मानी। उनके छोटे भाई अनीस, जो गैरेज में काम करके परिवार का खर्च उठाते थे, अंसार की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद करते रहे। यह भाई-बहनों का प्यार और त्याग ही था, जिसने अंसार को उन दिनों में भी संभाले रखा, जब सब कुछ छोड़ देने का मन करता था।

सफलता की रणनीति

1. लगातार लंबे घंटे की मेहनत

अंसार की सफलता का सबसे बड़ा राज थी उनकी अनुशासित और लगातार मेहनत। तीन साल तक वह रोजाना 12 से 13 घंटे पढ़ाई करते थे, और इस दौरान उनका फोकस सिर्फ और सिर्फ सिलेबस पूरा करने पर रहता था। उन्होंने समय की बर्बादी से बचने के लिए सोशल मीडिया और फिजूल की गतिविधियों से खुद को दूर रखा। उनका मानना था कि तैयारी के दौरान हर दिन का हिसाब होना चाहिए, इसलिए वह रोज के लक्ष्य तय करते और उन्हें पूरा किए बिना नहीं सोते थे। यही अनुशासन अंततः उन्हें सफलता के शिखर तक ले गया।

2. जिज्ञासा और सवाल पूछने की आदत

अंसार खुद कहते हैं कि उन्हें अक्सर सवाल पूछने पर कोचिंग में मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी जिज्ञासा को दबने नहीं दिया। उनका मानना है कि UPSC जैसी परीक्षा में गहराई से समझना ज्यादा जरूरी है, रटना नहीं। हर टॉपिक को सवाल-जवाब के जरिए समझने की उनकी आदत ने मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू दोनों में उन्हें फायदा पहुंचाया। वह कहते हैं कि जो छात्र सवाल पूछने से डरता है, वह कभी विषय की जड़ तक नहीं पहुंच सकता।

3. खुद को ही अपना प्रतिद्वंद्वी बनाना

अंसार का सबसे प्रसिद्ध संदेश है — “आपकी प्रतिस्पर्धा लाखों अभ्यर्थियों से नहीं, खुद से है।” उनका कहना है कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी लड़ाई बाकी लाखों छात्रों से है, तो आप गलत हैं। हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाना ही असली तैयारी है। नकारात्मक विचारों को दूर रखकर और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने से सफलता खुद-ब-खुद मिलती है। यह मानसिकता उन्हें तैयारी के सबसे कठिन दौर में भी शांत और केंद्रित रखती थी।

4. परिवार के बलिदान को प्रेरणा बनाना

अंसार के लिए उनके भाई अनीस का स्कूल छोड़कर गैरेज में काम करना सबसे बड़ी प्रेरणा था। वह जानते थे कि उनके परिवार ने उन पर जो दांव लगाया है, उसे हारना उनके भाई के त्याग का अपमान होगा। यही भावना उन्हें रोज सुबह उठने और देर रात तक पढ़ने की ताकत देती थी। उन्होंने अपने परिवार के संघर्ष को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और यही उनकी सफलता की नींव साबित हुई।

सफलता का वह ऐतिहासिक क्षण

2016 में जब UPSC सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम आया, तो 21 साल के अंसार ने पहले ही प्रयास में 361वीं रैंक हासिल कर ली थी। इस उपलब्धि के साथ वह देश के सबसे युवा IAS अधिकारी बन गए। जब उन्होंने अपने परिवार को यह खबर दी, तो घर वाले हैरान रह गए — उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अब IAS अधिकारी है। अंसार ने मराठी माध्यम से परीक्षा दी थी और इंटरव्यू में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर मिला, जहां वह पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

युवाओं के लिए संदेश

अंसार अहमद शेख आज देशभर के युवाओं से कहते हैं कि आपकी पृष्ठभूमि मायने नहीं रखती और नंबर आपकी बुद्धिमत्ता को परिभाषित नहीं करते। सिर्फ कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प ही आपके लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं। वह युवाओं से आग्रह करते हैं कि कभी सवाल पूछने से न डरें, हर दिन खुद को बेहतर बनाएं और नकारात्मक सोच को अपने पास न आने दें। उनका जीवन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि गरीबी इंसान को तोड़ने नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाने आती है।

निष्कर्ष

अंसार अहमद शेख की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि करोड़ों सपनों की जीत है। शेलगांव के एक छोटे से घर से लेकर पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक पदों तक का उनका सफर यह सिखाता है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो हालात से लड़ना जानते हैं। गरीबी, घरेलू कलह, आर्थिक तंगी — कुछ भी उनके हौसलों को नहीं तोड़ सका। आज वह हर उस छात्र के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो मुश्किल हालातों में बड़े सपने देखता है। उनकी कहानी हमें यही सिखाती है कि सपना देखो, मेहनत करो और कभी हार मत मानो — सफलता एक दिन जरूर आपके कदम चूमेगी।

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