Sandeep Budania success story : पढ़ाई में नहीं लगता था मन, 34 बार असफल होने के बाद बने आयकर विभाग में अधिकारी

Sandeep Budania : असफलता ही सफलता की कुंजी है बशर्ते कि हम अपनी असफलताओं से सीख लेते हुए एवं उन गलती को ना दोहराते हुए निरंतर प्रयास करते रहे तो एक न एक दिन सफलता हमें जरूर मिलती है। कई बार हमें अपनी मेहनत का फल मिलने में देर हो जाता है और इसी बीच कुछ लोग अपना धैर्य खो कर प्रयास करना छोड़ देते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बार बार लगातार विफल होने के बाद भी अपने धुन के पक्के होते हैं और मंजिल को पाने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाने को तैयार रहते हैं। आज हम आपको ऐसे ही लड़के संदीप बुडानिया की कहानी बताने जा रहे हैं जो 34 बार फेल हो चुके लेकिन अंत में उन्होंने अपनी मेहनत और लगन की बदौलत सफलता हासिल कर ली.

कौन है (Sandeep Budania) संदीप बुडानिया

आयकर निरीक्षक संदीप बुडानिया का जन्म 18 अक्टूबर 1992 को पाठनकोट में हुआ। हालांकि उनका पैतृक घर राजस्थान के झुंझुनूं की चिड़ावा तहसील की नारनोद के पास है। इनके पिता रमेश बुडानिया भारतीय सेना में सूबेदार थे। माँ सुनीता देवी घर के कामकाज संभालती हैं। संदीप की शुरुआती शिक्षा पठानकोट से हुई। संदीप बताते हैं कि उनके पिता आर्मी में थे इसलिए उनका ट्रांसफर होता रहता था. इसलिए उनका स्कूल भी बदलता रहा.

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उन्होंने दिल्ली कैंट, ग्वालियर कैंट और हिसार कैंट के आर्मी स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की. 11वीं के बाद वो झुंझनू में जाकर रहने लगे. संदीप ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पिलानी स्थित श्रीधर विश्वविद्यालय की पूरी की. संदीप के पिता 2009 में भारतीय सेना से रिटायर हो गए। संदीप के बड़े भाई मनोज बुडानिया जयपुर में बिजनेस करते हैं। इनकी बड़ी बहन संजू की शादी हो चुकी है और वो दिल्ली में निजी स्कूल में टीचर हैं। संदीप की पत्नी का नाम नीतू फोगाट है।

आर्मी में जाना चाहते थे संदीप बुडानिया

अपने पिता को देश की रक्षा करते देख संदीप के मन भी फौजी बनकर देश की रक्षा करने का विचार आया। उन्हें वर्दी से भी लगाव था। पिताजी की फौज की जिंदगी उन्हें बहुत रोमांचित करती थी। संदीप कहते हैं कि मेरी रगों में एक फौजी का खून दौड़ रहा है। संदीप ने डिफेंस सर्विस में जाने के लिए खूब प्रयास किए। 12वीं की परीक्षा पास करने के साथ ही उन्होंने एनडीए की परीक्षा देनी शुरू कर दी थी लेकिन सफलता हाथ नही लगी। फिर सैन्य अफसर बनने के लिए एसबीएस, टीईएस, एएफकैट आदि की 19 बार परीक्षाएं दी। यहाँ भी उन्हें असफलता हाथ लगी। इतनी असफलताओं के बाद कोई सामान्य व्यक्ति परेशान होकर मेहनत करना छोड़ देता लेकिन डिफेंस सेवाओं में जाने की उम्र निकल जाने के बाद भी संदीप बुडानिया ने हिम्मत नही हारी और अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग्य आजमाना शुरू किया।

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साल 2013 से लेकर 2016 तक उन्होंने  एसआई, सीपीओ, एसएससी सीजीएल, एलआईसी एएओ, असिस्टेंट कमांडेंट, पीओ, क्लर्क और आयकर विभाग में निरीक्षक पद के लिए परीक्षाएं दी। कामयाब होने के विश्वास के साथ उन्होंने कई परीक्षाएं बार बार दी। दस परीक्षाओं में साक्षात्कार तक भी पहुंचे लेकिन किसी कारणवस सफल नहीं हो पा रहे थे. उन्हें बार बार असफलता ही मिल रही थी। संदीप जयपुर में रहकर कोचिंग करते थे। इतनी असफलताओं का सामना करने वाले संदीप बताते हैं कि बार-बार असफल होने के कारण लोग हर बार उनसे पूछने लगे थे कि उनका इस बार का रिजल्ट कैसा रहा। असफलता से निराश संदीप इस प्रश्न पर निरुत्तर हो जाते थे और इसलिए इन प्रश्नों से बचने के लिए वह रात को जयपुर से घर आया करते थे।

असफलताओं के बादल के बीच निकला सफलता का सूरज

साल 2017 का सूरज संदीप के जीवन में नई किरण एवं नई रोशनी लेकर आया। लगातार असफलताओं के बादल से घिरे रहने के बाद आखिरकार साल 2017 को संदीप ने सफलता प्राप्त कर ली। उन्होंने आयकर निरीक्षक की परीक्षा दी थी जिसका रिजल्ट 5 अगस्त 2017 को घोषित हुआ और संदीप की खुशी का ठिकाना उस वक्त नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि वह इस परीक्षा में पास कर गए हैं और आयकर निरीक्षक के रूप में उनका चयन हुआ है।

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संदीप कहते हैं कि उन्हें अपनी कामयाबी पर भरोसा था लेकिन लगातार असफलता के कारण वह निराश भी थे हालांकि उनका मानना है कि इस विपरीत परिस्थिति में उनका उनके परिवार ने उनका बहुत सहयोग दिया। उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड नीतू फोगाट को भी सफलता का श्रेय दिया और कहा कि विपरीत परिस्थितियों में नीतू ने भी उनका बहुत साथ दिया और उन्हें लगातार मेहनत करने को प्रेरित करती रही। सितंबर 2018 से वे आयकर विभाग दिल्ली में बतौर आयकर निरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जो लोग संदीप को ताना दे रहे थे आज वही लोग उनसे सफलता के टिप्स मांग रहे हैं।

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