nandini k r : 3 बार लगातार असफलता मिलने पर दोस्तों ने उड़ाया था मजाक, आखिरी प्रयास में पहली रैंक हासिल कर बनीं IAS अधिकारी

KR Nandini ias

K R Nandini ias : ‘मन के हारे हार है मन के जीते जीत’, इतिहास गवाह है कि जिसे भी वीर कहा गया है, उसने कभी घुटने नहीं टेके, हमेशा डटकर परिस्थितियों का सामना किया और आखिर में जीत हासिल की, ऐसी ही एक शख्शियत के बारे में आज हम बताने जा रहे हैं। जिन्होंने एक-दो बार नहीं बल्कि चार बार पूरी ताक़त से लड़ाई लड़ी और एक IAS अधिकारी बनकर अपना नाम रोशन किया.

ये बात सभी जानते हैं कि सिविल सेवक बनने का रास्ता आसान नहीं होता लेकिन लगातार हारकर भी लक्ष्य के लिए डटे रहना और उसे प्राप्त करना उससे भी ज़्यादा मुश्किल है. नंदनी को UPSC परीक्षा में सफलता मिलना आसान नहीं था. एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया है कि जब उन्हें लगातार असफलता मिल रही थी तब उनके दोस्त भी मजाक उड़ाने लगे थे. लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत और अपने आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया और अपने सपनों को साकार कर लिया आइए जानते हैं IAS के आर नंदिनी ने कैसे यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की

कौन हैं (K R Nandini ias) के आर नंदिनी

सोने की खदान के लिए मशहूर कोलार,कर्नाटक की रहने वाली नंदिनी बचपन से ही IAS अधिकारी बनना चाहती थी। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली नंदनी के पिता एक स्कूल में टीचर हैं। नंदनी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की. यहां उन्होंने हाईस्कूल तक पढ़ाई की. उन्होंने सेंट जोसेफ कॉन्वेन्ट गर्ल्स हाई स्कूल से हाईस्कूल किया और इसके बाद वो 12वीं की पढ़ाई के लिए चिकमंगलूर ज़िले के मूदाबिदरी आ गईं. बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल किए. इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने 94.83 प्रतिशत अंक हासिल किया था।

अपनी बेसिक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने MS रमैय्या इंजनियरिंग कॉलेज बेंगलुरू से बी.टेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई में भी वो पढ़ाई में काफी अच्छी थी. यही वजह थी पढ़ाई के बाद उनकी कर्नाटक के ही PWD विभाग में नौकरी लग गई. अच्छी खासी नौकरी लगने के बाद भी नंदनी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुई. अभी तक उनका बचपन का IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा नहीं हुआ था. इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर दिया.

परीक्षा से संबंधित इनका स्ट्रगल

K.R. नंदिनी ने साल 2014 में 642वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बन गईं थी लेकिन उनका मक़सद IAS बनना ही था, यही कारण है कि उन्होंने फिरसे प्रयास किया लेकिन साल 2015 में भी वो IAS अधिकारी नहीं बन पायी, लेकिन उनका ये कहना है कि ‘मैंने हार नहीं मानी’ और साल 2016 में सिविल सर्विस की परीक्षा में टॉप किया और पहली रैंक हासिल की.

वो बताती हैं कि इन पाँच सालों का सफ़र आसान तो नहीं रहा लेकिन मैंने मुश्किल भी नहीं होने दिया और परिणाम हमारे सामने है। अपने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के संघर्ष के बारे में वो बताती हैं कि जब वो चौथा प्रयास की तैयारी कर रहीं थी तब उनके दोस्त उनका मजाक उड़ाया करते थे. उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों की बातों को दरकिनार करने हुए अपनी तैयारी जारी रखी और सफलता हासिल की.

पहली रैंक हासिल कर बनीं अधिकारी

अपने प्रथम प्रयास में 642वीं रैंक प्राप्त करने वाली नंदिनी की मेहनत और लगन ने उन्हें पहली रैंक तक का सफ़र तय कराया। ये रास्ता प्रत्येक व्यक्ति के लिए उतना ही मुश्किल है जितना आई ए एस नंदिनी के लिए था, लेकिन ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

नंदिनी अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए कहती हैं कि ‘हमारा उसूल होना चाहिये कि हम जहाँ हैं वहाँ अपना सर्वश्रेष्ठ दें’, वो अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि मैंने कभी घंटों के हिसाब से पढाई नहीं की, बल्कि हमेशा से विषयों को ध्यान में रखकर एक नियमित लक्ष्य बनाकर पढाई की और इसका नतीजा कभी भी बेहद खराब नहीं रहा और तो और अंत में लक्ष्य की प्राप्ति भी हुई। अभ्यार्थियों के लिए वो कहती हैं कि सब्जेक्ट मायने नहीं रखता आप, केवल मेहनत करिये सफ़लता अवश्य मिलेगी।