ias nidhi bansal : 2 बार आईपीएस अधिकारी बनने के बाद भी नहीं कम हुआ जुनून, 34वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS अधिकारी

ias nidhi bansal

: देश की एक ऐसी प्रतियोगी परीक्षा जिसको उत्तीर्ण करने के बाद पूरा होता है, देश के सबसे बड़े अधिकारी बनने का सपना। यह सपना देखना तो आसान है लेकिन पूरा करना उतना ही मुश्किल। लगभग देश का हर युवा यूपीएससी की परीक्षा पास करना चाहता है, लेकिन सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जो दिन रात एक कर पूरी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते हैं। UPSC की परीक्षा में किसी भी रैंक के साथ सफलता मिलने पर अभ्यर्थियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है।

ऐसे में अगर हम आपसे कहे कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता मिलने के बाद भी कोई आईपीएस जैसे पोस्ट को छोड़कर, एक बार फिर से तैयारी में जुट जाए तो इस बात पर यकीन करना आपके लिए शायद मुश्किल हो जाए। लेकिन आज के इस पोस्ट में हम एक ऐसे ही आईएएस ऑफिसर की कहानी लेकर आपके सामने आए हैं। जिन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए एक बार नहीं बल्कि दो बार आईपीएस जैसी पोस्ट को छोड़ दिया। आज के इस पोस्ट में हम बात कर रहे हैं आईएएस ऑफिसर निधि बंसल की।

कौन हैं (ias nidhi bansal) आईएएस निधि बंसल

निधि बंसल मध्य प्रदेश राज्य के कैलारस कस्बे, मुरैना की रहने वाली हैं। इनके पिता गिर्राज बंसल लोहे के व्यापारी हैं, जबकि मां एक हाउसवाइफ है। निधि ने अपनी शुरुआती शिक्षा मुरैना से ही प्राप्त की। इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद निधि ने एनआईटी त्रिचि से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की।

ias nidhi bansal : 2 बार आईपीएस अधिकारी बनने के बाद भी नहीं कम हुआ जुनून, 34वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS अधिकारी 1

साल 2013 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद निधि बेंगलुरु में स्थित एक एमएनसी कंपनी में जॉब करने लगी। यह नौकरी तो करने लगी पर संतुष्ट नहीं थी। इनकी मंजिल कहीं और थी। इनका सपना एक आईएएस ऑफिसर बनने का था।अपने सपने को पूरा करने के लिए निधि नौकरी छोड़ दिल्ली चली आई और यहां पर यूपीएससी की तैयारी में जुट गई।

2 बार बनीं आईपीएस अधिकारी

निधि के लिए आईएएस अधिकारी बनने का रास्ता कठिन था और मंजिल काफी दूर। लेकिन वो कहते है ना कि यदि दिल में चाहत हो और मन में लगन तो रास्ता अपने आप बन जाता है। यूपीएससी के पहले प्रयास में निधि को सफलता नहीं मिली। साल 2016 में जब निधि ने दूसरी बार परीक्षा दी तब इन्हें यूपीएससी की परीक्षा में 219 वी रैंक हासिल हुई।

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इनका चयन त्रिपुरा कैडर में आईपीएस के रूप में हुआ। चूंकि निधि का सपना आईएएस ऑफिसर बनने का था इसलिए उन्होंने आईपीएस को छोड़ दिया और एक बार फिर तैयारी में जुट गई। साल 2017 तीसरे प्रयास में निधि को यूपीएससी में 226 वीं रैंक मिली। इस बार इन्हें झारखंड कैडर में आईपीएस की पोस्ट मिली। अभी निधि को मनचाही मंजिल नहीं मिली थी इसलिए यह एक बार फिर से प्रयास में लग गई।

23वीं रैंक हासिल कर बनीं आईएएस अधिकारी

आखिरकार इनकी मेहनत रंग लाई और इनका चयन आईएएस ऑफिसर के रूप में हो गया। निधि ने साल 2019 में 23वी रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। आखिरकार इनके आईएएस बनने का सपना पूरा हो गया। पांचवें प्रयास में निधि ने अपने सपने को पूरा किया और मुरैना की एक साधारण सी लड़की आईएएस ऑफिसर बन गई. अपनी सफलता से निधि ने यह साबित कर दिया है, कि यदि सच्चे मन से किसी रास्ते पर चलने का निर्णय किया जाए और जब तक मंजिल ना मिल जाए प्रयत्नशील रहा जाए तो सफलता कदम अवश्य चूमती है।

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