Farman ahmad khan ias : 5 बार फेल होने के बाद मिली यूपीएससी परीक्षा में सफलता, 258वीं रैंक हासिल कर बनें IAS अधिकारी

हिंदी के लोकप्रिय कवि डॉक्टर सोहनलाल द्विवेदी की एक कविता है- ‘ लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’. आज हम आपको जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनके जीवन पर इस कविता की पंक्तियां चरिथार्थ करती है. इस आईएएस अधिकारी का नाम फरमान अहमद खान है.

उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास करने का सपना देखा था. जिसके लिए उन्होंने एक, दो नहीं बल्कि 5 बार असफलता मिलने के बाद भी हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे. उनकी मेहनत और लगत की बदौलत उन्होंने 6वें प्रयास में अच्छी रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनकर अपने सपनों को साकार किया। आइए जानते हैं फरमान अहमद ने कैसे यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने के सपने को पूरा किया

कौन हैं (Farman ahmad khan ias) आईएएस फरमान अहमद खान

फरमान अहमद खान हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले हैं. वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं. फरमान के पिता डीएम कार्यालय में सरकारी नौकरी करते थे. जबकि उनकी मा घर संभालने का काम करती थी. उनकी शुरुआती पढ़ाई गुरुग्राम से ही हुई. फरमान अहमद बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे। इन्होंने शुरुआत से ही अपने दिमाग को एक लक्ष्य पर केंद्रित कर लिया था।

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यही वजह थी कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद इंजीनियरिंग से बीटेक कर स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली. बेसिक और स्नातक की शिक्षा के बाद वो यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली चले गए. यहां पर इन्होंने जामिया रेजिडेंशियल कोचिंग में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

पांच बार असफलता के बाद भी नहीं टूटा हौसला

फरमान अहमद ने इस जामिया रेजिडेंशियल कोचिंग संस्थान में रहकर साल 2014 से लेकर साल 2019 तक का लंबा समय गुजारा। इस दौरान उन्होंने खूब मेहनत से यूपीएससी की तैयारी की. हालांकि मेहनत के बाद भी उन्हें लगातार निराशा झेलनी पड़ी. यूपीएससी परीक्षा में लगातार असफलता के बाद भी उन्होंने अपना हौसला करना नहीं छोड़ा. फरमान अहमद का यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सलाह देते हैं कि यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में धैर्य होना अत्यंत आवश्यक है। जो भी अभ्यर्थी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हो उन्हें असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए और बिना रुके कोशिश करते रहना चाहिए।

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अपने अनुभव को साझा करते हुए फरमान ने बताया कि इस सफलता को हासिल करने में उन्हें 7 साल लगे, लेकिन असफलताओं ने उनके मनोबल को कभी नीचे गिरने नहीं दिया बल्कि दुगनी मेहनत के साथ वह कदम आगे बढ़ाते गए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए फरमान की सलाह है कि परीक्षा में की गई छोटी-छोटी गलतियां सफलता की राह में आड़े आती हैं। फरमान का कहना है कि कभी भी अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा में नहीं बैठना चाहिए।

क्योंकि जब आप अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा में बैठते हैं, तो आपका सिलेक्शन तो नहीं होता है, साथ में आपका एक अटेम्प्ट भी चला जाता है। इसलिए जब तैयारी पूरी तरह से हो जाये, तभी परीक्षा में बैठना चाहिए। इसके साथ ही इनका कहना है कि पूरी तैयारी व बेहतर रणनीति के साथ अगर परीक्षा दी जाए तो सफलता मिलने में आसानी होती है।

258वीं रैंक हासिल कर बनें IAS अधिकारी

पांच बार की लगातार असफलताओं के बाद भी इन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना नहीं छोड़ा. पूरी मेहनत और लगन के साथ वो तैयारी करते रहे. साल 2019 में उनका यूपीएससी में इनका चयन हुआ। छठवे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 258वीं रैंक हासिल किया. इसके बाद इनका सिलेक्शन आईएएस अधिकारी के तौर पर हो गया. उनका चयन आंध्र प्रदेश कैडर में हुआ। फरमान ने यूपीएससी की मुख्य परीक्षा के लिए अंग्रेजी भाषा का चयन किया था, जबकि साक्षात्कार के लिए इन्होंने हिंदी भाषा चुनी थी।

फरमान का मानना है कि अगर कोई अच्छा गाइड करने वाला साथ हो तो बिना कोचिंग के भी यूपीएससी की तैयारी की जा सकती है। परंतु यदि आपके पास कोई ऐसा शख्स मौजूद नहीं है जो आपको गाइड कर सके तो ऐसे में बिना कंफ्यूज हुए आप किसी भी अच्छी कोचिंग संस्थान का सहारा ले सकते हैं। सफल होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि आप किस कोचिंग संस्थान में तैयारी कर रहे हैं। सफलता के लिए आवश्यक है कि आपको खुद पर कितना विश्वास है। अतः अभ्यर्थियों को बिना कंफ्यूज हुए आत्मविश्वास के साथ तैयारी में जुट जाना चाहिए।

उन्हें सफल होने से कोई रोक नहीं सकता। फरमान अहमद खान यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने वाले उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जो पहले, दूसरे प्रयास में असफल होने पर ही हार मान लेते हैं। अभ्यर्थियों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने लगातार मिल रही असफलताओं से भी हार नहीं मानी और बिना रुके और आगे बढ़ते गए और सफलता का स्वर्णिम इतिहास रचा।

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