Suraj Kumar IIT : जेल में रहकर की आईआईटी परीक्षा की तैयारी, 34वीं रैंक हासिल कर बनें टॉपर

Suraj Kumar IIT

Suraj Kumar IIT : भारत के मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, “शिक्षा से ही एक इंसान महान नागरिक बनता है और देश और दुनिया को ऐसे महान नागरिकों की जरूरत है।” शिक्षा ही एक मात्र ऐसा माध्यम है जिसके जरिए समाज को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर लक्ष्य निर्धारित हो और हौसला मजबूत हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। कड़ी मेहनत और लगन से जिंदगी में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

आज हम आपको एक ऐसे ही युवा की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने कठिन वक्त में भी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। सफलता की कहानी में आज हम सूरज कुमार उर्फ कौशलेंद्र की बात करेंगे. जिन्होंने जेल में रहते हुए अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और अपने सपनों को फीका नहीं होने दिया. उन्होंने जेल में रहते हुए ना सिर्फ आईआईटी की परीक्षा पास की बल्कि अच्छी खासी रैंक हासिल कर इंजीनियरिंग में नामी गिरामी कॉलेज में अपनी जगह बना ली.

कौन हैं सूरज कुमार

सूरज कुमार बिहार में वारिसलीगंज के मोसमा गांव के रहने वाले हैं। सूरज ने शुरुआती शिक्षा-दीक्षा वहीं रहकर हासिल की है। सूरज बचपन से ही बड़े-बड़े सपने देखते थे। वो आगे चलकर वैज्ञानिक बनने का ख्वाब संजोए भी बैठे थे, लेकिन बीते साल हुई एक घटना ने उनकी जिंदगी बदल कर रख दी और उन्हें जेल की हवा खानी पड़ गई।

पिछले साल गांव में हुई एक मारपीट की घटना के बाद से सूरज विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद हैं। दरअसल 19 अप्रैल 2021 को मारपीट की एक घटना में गांव के रहने वाले 45 साल के एक शख्स संजय यादव की मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक के परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने सूरज समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, तब से सूरज जेल में बंद हैं।

पहले भी क्रैक किया है IIT जैम

जेल जाने से पहले सूरज ने आईआईटी जैम की परीक्षा दी थी, जिसमें उन्हें सफलता भी हासिल हुई। उन्होंने ऑल इंडिया 34वीं रैंक हासिल की, लेकिन उसी वक्त उन्हें जेल जाना पड़ गया। इसी वजह से उनका कहीं एडमिशन नहीं हो पाया। हालांकि जेल जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और जेल में रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। सूरज लगातार सेल्फ स्टडी करते रहे।

एक बार फिर हासिल की सफलता

2022 में सूरज ने जेल में रहते हुए एक बार फिर IIT जैम की परीक्षा दी और इस बार फिर उन्होंने इस एग्जाम को क्रैक कर लिया। इस बार उन्होंने ऑल इंडिया 54वीं रैंक हासिल की। सूरज के मुताबिक उनकी इस सफलता में कारागार अधीक्षक अभिषेक कुमार पांडेय की बहुत बड़ी भूमिका रही। उन्होंने जेल के अंदर परीक्षा से संबंधित नोट्स और किताबें उपलब्ध कराईं, जिसके चलते वो एग्जाम की बेहतर तैयारी कर सके।