Odhavaji Raghavji Patel : कौन है ओधावजी पटेल? जिन्होंने 150 रुपए से शुरू की कंपनी ,और आज बन गयी 1000 करोड़ की कंपनी

Odhavaji Raghavji Patel : कभी- कभी किसी की छोटी सी शुरुआत आपकी आशा से कई हजार गुना फल देती है। थोड़े रुपये से शुरु किया गया आपका बिजनेस करोड़ो रूपये का हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है ओधावजी पटेल की जिनकी कहानी पढ़कर आपको कुछ न कुछ सीखने को जरूर मिलेगा।

आप लोगों ने कभी न कभी अजंता, ऑपरेट या ओरेवा ब्रांड का कोई न कोई सामान जरूर यूज़ किया होगा। आज हम उसी कम्पनी के ब्रांड की बात कर रहे हैं। इन ब्रांड्स की बात हो और उनके संस्थापक की बात न ही तो ये आपके साथ नाइंसाफी होगी। ओधावजी पटेल का जन्म 24 जून 1925 को मोरबी शहर, गुजरात में हुआ था। ओधावजी पटेल (Odhavaji Raghavji Patel) का ताल्लुक एक किसान परिवार से था। उन्होंने घर की पारंपरिक खेती-बाड़ी को छोड़ कर बिजनेस की ओर रुख किया। इन्होंने विज्ञान से स्नातक किया और बी०एड० किया।

पढ़ाई पूरी कर ओधावजी पटेल शिक्षक बन गए

अपनी शिक्षा पूरी कर ओधावजी पटेल 150 रुपये प्रति महीने की तनख्वाह पर वीसी स्कूल में गणित और विज्ञान के अध्यापक बन गए। इनकी शादी भी हो चुकी थी और इनके ऊपर बच्चों की शिक्षा का भी दबाव था। टीचिंग के पैसे से केवल घर की जरूरत ही पूरी हो पाती थी। पटेल घर से ज्यादा स्कूल पर ध्यान देने लगे।

घर की आर्थिक स्थिति से जैसे उन्हें कोई विशेष फर्क नही पड़ता था. उनकी पत्नी उनकी इस आदत परेशान होने लगी। उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाती थी। वो उनसे स्कूल से आने के बाद आने के बाद बिजनेस शुरू करने के लिये कहती थी। लेकिन पटेल जी का सिद्धांत था कि वो जो काम करते पूरे मन से करते थे।

टीचर की नौकरी छोड़कर 150 रुपए से शुरू किया बिजनेस

घर की आर्थिक स्थिति, पत्नी की डाँट और बिजनेस में प्रोत्साहन के बाद उन्होंने पूरी तरह से बिजनेस में उतरने का फैसला किया। उन्होंने (Odhavaji Raghavji Patel) बिजनेस में जाने का फैसला तो कर लिया लेकिन अब उनके पास दुविधा यह थी कि वह किस क्षेत्र में कदम रखें। कई क्षेत्रों के बारे में सोच-विचार कर उन्होंने कपड़े व्यवसाय में उतरने का फैसला किया। उन्होंने मोरबी शहर में एक कपड़े की दुकान मात्र 150 रुपये लगाकर शुरू की। इनकी कपड़े की दुकान चल पड़ी। उन्होंने उस पैसे से दुकान को और विस्तृत कर दिया। अब उनकी कई दुकानें हो गयी थी। उन्होंने उस पैसे को इन्वेस्ट करने की योजना बनाई।

ओधावजी पटेल (Odhavaji Raghavji Patel) ने इंजन ऑयल का के क्षेत्र में भी कदम रखा

पटेल जी (Odhavaji Raghavji Patel) की यह एक खासियत थी कि वह जिस भी क्षेत्र में कदम रखते थे। उसकी बड़ी बारीकी से परख करते थे। 1960 के दशक में गुजरात मे पानी की कमी होने लगी। तब गुजरात के कई इलाकों में पानी निकालने वाली मशीन गड़ने लगी। उस समय इंजन ऑयल की डिमांड तेजी से बढ़ी।

यही सबसे सही समय था इस क्षेत्र में उतरने का समय की नजाकत देख कर उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा। यह उनकी दूरदर्शिता और प्रबंधन का ही नतीजा था की उनका बिजनेस चल पड़ा। ओधावजी ने अपने इस बिजनेस का नाम जयश्री के नाम से रखा। उनके बिजनेस के चल निकलने से उन्होंने और क्षेत्रों में सम्भावना तलाशना शुरू किया।

घड़ी के व्यवसाय में हुआ नुकसान

ओधावजी पटेल ने अजंता नाम की कंपनी की शुरुआत की. कंपनी की शुरुआत करते ही उनको काफी नुकसान का सामान करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया कि अजंता कम्पनी (Ajanta Group) को बंद करने की स्थिति आ गई। फिर भी उन्होंने कंपनी नही बंद की और नए-नए प्रयोग करते रहे। उनके (Odhavaji Raghavji Patel) संघर्ष का फल था की उनकी कंपनी धीरे-धीरे लोगों के नजर में आने लगी। कुछ सालों बाद उनका कम्पनी भारत की सबसे पसंदीदा ब्रांड में से एक हो गयी।

ऐसे अजंता बनी 1000 करोड़ की कंपनी

ओधावजी पटेल (Odhavaji Raghavji Patel) का 150 रुपये 1000 करोड़ का सफर आसान नहीं रहा उन्होंने उस बीच बहुत लम्बा सफर तय किया। पटेल जी की जिंदगी का सिलसिला 1935 से शुरू होकर 2012 में हो खत्म हो गया। इस लंबे सफर में उन्होंने बहुत कुछ देखा और बहुत बार घाटा और नुकसान सहा। फिर भी हार नही मानी। आज पटेल जी की दो और कंपनियां करोड़ो का टर्न ओवर कर रही है। ये कंपनियां उनके परिवार के सदस्य देखते हैं।

इसलिए कोई शुरुआत छोटी नही होती बस उसका लक्ष्य बड़ा होता चाहिये। ओधावजी पटेल ऊपर एक लाइन काफी सटीक बैठती हैं “सफर पर निकलो तो सही रास्ते खुद मंजिल पर पहुँचा देते है।

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