Ghasiram Verma : 95 साल का करोड़पति गणितज्ञ जिसे अमेरिका से मिलती है पेंशन, लाखों रुपए बच्चियों की शिक्षा पर करते हैं खर्च

Ghasiram Verma : 95 साल का करोड़पति गणितज्ञ जिसे अमेरिका से मिलती है पेंशन, लाखों रुपए बच्चियों की शिक्षा पर करते हैं खर्च

Ghasiram Verma : राजस्थान के डॉक्टर घासीराम वर्मा का नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। पूरा राजस्थान जानता है कि वो फकीर करोड़पति हैं। हर साल वो बेटियों की शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। कई साल पहले शुरू हुआ ये सिलसिला अब भी जारी है। आपको बताते चले कि घासीराम वर्मा काफी जाने-माने गणितज्ञ हैं। वो अमेरिका में रहते हैं और डॉलर में पेंशन पाते हैं। उन्हीं पैसों से वो बेटियों की शिक्षा पर पैसा खर्च करते हैं।

इसी साल 1 अगस्त को घासीराम ने अपना 95वां जन्मदिन मनाया है। जन्मदिन के मौके पर झुंझुनू के 2 दर्ज़न संस्थाओं ने सामुदायिक भवन में डॉक्टर घासीराम वर्मा का नागरिक अभिनंदन किया। घासीराम वर्मा ने कहा कि वो स्थायी रूप से झुंझनूं में ही रहेंगे। पहले वो अमेरिका में रहा करते थे लेकिन साल में 2 से 3 महीने के लिए हर साल भारत आना पड़ता था फिर अमेरिका जाना पड़ता था.

50 लाख रुपये बच्चियों की शिक्षा पर करते हैं खर्च

डॉक्टर घासीराम वर्मा मूलत: झुंझुनू के गांव सीगड़ी के रहने वाले हैं। एक अगस्त 1927 को चौधरी लादूराम तेतरवाल और जीवणी देवी के घर में उनका जन्म हुआ था। 12वीं पास करने के बाद अबूझ सावे गांव नयासर के गंगारामजी की बेटी रुकमणि के साथ इनका विवाह किया गया था। घासीराम के 3 बेटे हैं। जिनका नाम- ओम, सुभाष और आनंद है। डॉक्टर घासीराम वर्मा की पेंशन की बात करें तो हर महीने वो साढ़े सात लाख रुपये पेंशन पाते हैं।

घासीराम पर किताब लिख रहे माणक मणि ने जानकारी देते हुए बताया कि सालरभर में वर्मा करीब एक करोड़ रुपये पेंशन और निवेश से कमाते हैं। इससे वो 50 लाख रुपये बच्चियों की शिक्षा के लिए खर्च करते हैं। सबसे खास बात ये है कि वो ये पैसा राजस्थान की बच्चियों के लिए खर्च करते हैं। हर महीने लगभघ साढ़े सात लाख रुपये उन्हें पेंशन से मिलते हैं।

शुरुआती दिनों में संघर्ष किया

घासीराम वर्मा के संघर्ष की बात करें तो उनके गांव सीगड़ी में स्कूल न होने के कारण वो पांच किलोमीटर दूर गांव वाहिदपुरा के एक स्कूल में पढ़ने जाते थे। उन्होंने आगे की पढ़ाई पिलानी से की, वहां वो हॉस्टल में रहते थे। छुट्टियों के समय वो गांव न जाकर बच्चों को पढ़ाते थे।

फिर उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से MA किया। 1958 में घासीराम को अमेरिका बुलाया गया। परिवार के साथ वो वहां पहुंचे। अमेरिका में रोडे आयलैंड यूनिवर्सिटी में गणित प्रोफेसर के रूप में काम किया। उस समय घासीराम अमेरिका में गणित पढ़ाने वाले पहले भारतीय थे। उनको उस समय 400 डॉलर वेतन मिलता था।

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