Anand Vardhan IAS : 3 बार UPSC परीक्षा में असफल होने पर भी नहीं टूटा हौसला, चौथे प्रयास में टॉपर बनकर किया सपना पूरा

Anand Vardhan IAS

Anand Vardhan IAS : “मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” हौंसला मजबूत हो तो आप कठनाईयों का कोई भी पहाड़ बड़ी आसानी से पार कर सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा भी किसी पहाड़ जैसी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन अगर हौंसला और इरादा उस चुनौती से बड़ा है तो कामयाबी मिलता तय है। सही दिशा में निरंतर प्रयास ही इस परीक्षा में सफलता की कुंजी है।

सफलता की कहानी में आज हम जिस आईएएस अधिकारी के बारे में बताने जा रहे हैं उनका नाम आनंद वर्धन हैं. आंनद को तीन बार यूपीएससी परीक्षा में असफलता का सामना करना पड़ा लेकिन अपने जुनून और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया. आखिर में उन्हें यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल हो गई. उनकी कहानी असफलता हासिल कर निराश हुए युवाओं के लिए प्रेरणा हो सकती है. आइए जानते हैं आनंद वर्धन के यूपीएससी के सफर के बारे में

कौन हैं (Anand Vardhan IAS) आनंद वर्धन

आनंद वर्धन बिहार के सिवान जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने सिवान से ही अपनी स्कूली शिक्षा हासिल की है। शुरूआती शिक्षा-दीक्षा के बाद आनंद ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है। ग्रेजुएशन के बाद आनंद ने कुछ वक्त नौकरी भी की, लेकिन इसी दौरान उनके अंदर सिविल सेवा को लेकर जज्बा पैदा हो गया और उन्होंने UPSC की तैयारी करने का मन बना लिया।

3 बार मिली असफलता, नहीं मानी हार

एक तरफ आनंद की नौकरी चल रही थी, तो दूसरी तरफ वो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। आनंद को नौकरी की वजह से UPSC की तैयारी करने में काफी परेशानी हुई। जॉब के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्ता वक्त नहीं मिल पाता था। ऐसे में उन्होंने वीकेंड क्लासेज ज्वाइन कर लीं ताकि परीक्षा की अच्छे तरह तैयारी हो सके। इसके अलावा भी जो खाली वक्त उन्हें मिलता था, उसे इस्तेमाल करते हुए वो अपनी पढ़ाई करने में लगा देते थे।

UPSC की तैयारी के बाद वक्त था इम्तिहान का। आनंद ने जब अपना पहला अटेम्प्ट दिया तो उन्हें असफलता हाथ लगी और ऐसा ही दूसरे और तीसरे प्रयास में भी हुआ। आनंद तीन बार लगातार सिविल सेवा परीक्षा का प्रिलियम्स की परीक्षा भी पास नहीं कर सके थे। इतना होना मात्र ही अपने आपमें निराशा पैदा करने के लिए काफी थी। हालांकि आनंद की हिम्मत और जज्बे ने उन्हें एक जुट किया और हार माने बगैर वो लगातार परीक्षा की तैयारी में लगे रहे। नाकामियों की वजहों पर उन्होंने काम किया और आगे बढ़ते रहे।

आखिरकार मिल गई यूपीएससी परीक्षा में सफलता

आनंद को तमाम असफलताओं के बीच निरंतर प्रयास का सकारात्मक नतीजा 2016 में मिला, जब उन्होंने न सिर्फ UPSC की परीक्षा पास की, बल्कि टॉप 10 कैंडिडेट्स में अपना नाम दर्ज कराया। 2016 में अपने चौथे प्रयास में आनंद ने ऑल इंडिया 7वीं रैंक हासिल की थी। आनंद बताते हैं कि संघर्ष के समय में उन्हें हमेशा परिवार का साथ मिला, जिसकी वजह से वो अपनी हिम्मत बनाकर रख पाए और कामयाबी की दहलीज तक पहुंचे।

कोचिंग को लेकर अपनी राय रखते हुए आनंद कहते हैं कि कोचिंग करना या नहीं करना व्यक्तित्व निर्णय है। कोचिंग करने से सही गाइडेंस और परीक्षा से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है जोकि अच्छी बात है। हालांकि सेल्फ स्टडी से ही बात बनती है, कोचिंग एक तरह से सहारा है।